16 अप्रैल 2026 - 12:02
अल्लाह और रसूल की इताअत और वली ए फ़क़ीह की पैरवी

दुश्मनों ने सोचा था कि सर्वोच्च नेता के निधन के बाद सब कुछ समाप्त हो जाएगा, लेकिन अल्लाह ने एक योग्य उत्तराधिकारी दिया। दुश्मनों की उम्मीदें टूट गईं।

कुम में हज़रत मासूमा के रोज़े में इमाम जाफर-ए-सादिक़ (अ) की शहादत के अवसर पर आयोजित प्रोग्राम में उलिल अम्र की इताअत के सिलसिले में खिताब करते हुए हुज्जतुल इस्लाम सय्यद सादिक मीरशफीई ने कहा कि इमाम सादिक़ (अ) ने 34 वर्षों के अपने दौरे इमामत में 4000 से अधिक शागिर्द तैयार किए गए।

कुराने करीम की आयत
«اطیعُوا اللَّهَ وَ اطیعُوا الرَّسُولَ وَ أُولِی الْأَمْرِ مِنْکُمْ»،(4:59)
का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कई शिया उलमा  के अनुसार 'उलिल-अम्र' से मुराद केवल मासूम इमाम (अ) से है। इमाम सादिक़ (अ)  ने खुद इस आयत की तफ़सीर करते हुए कहा कि उलिल-अम्र अहले-बैत (अ) के वे इमाम हैं जिन्हें अल्लाह ने नियुक्त किया है।

उन्होंने वर्तमान परिस्थितियों से तुलना करते हुए कहा, दुश्मनों ने सोचा था कि सर्वोच्च नेता इमाम खुमैनी के निधन के बाद सब कुछ समाप्त हो जाएगा, लेकिन अल्लाह ने एक योग्य उत्तराधिकारी दिया। दुश्मनों की उम्मीदें टूट गईं।

उन्होंने अंत में कहा कि मासूम उलिल-अम्र की इताअत अल्लाह और उसके रसूल की इताअत है। आज सर्वोच्च नेता आयतुल्लाह सय्यद मुजतबा हुसैनी खामेनेई की पैरवी उसी मार्ग की निरंतरता और उसी राह का तसलसुल है।

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