अहल-ए-बैत (अ.स.) समाचार एजेंसी 'अबना' की रिपोर्ट के मुताबिक, यह प्रस्ताव मंगलवार को पाकिस्तानी सीनेट में सर्वसम्मति से पारित हुआ। इस दौरान सदस्यों ने फिलिस्तीन की जनता के समर्थन और इस्राईल की साम्राज्यवादी योजनाओं के विरोध की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।
प्रस्ताव में कहा गया है कि "पाकिस्तान की सीनेट गज़्ज़ा में युद्धविराम समझौते के लगातार उल्लंघन और 22 फरवरी 2026 को ज़ायोनी प्रधानमंत्री द्वारा दिए गए उस बयान की कड़ी भाषा में निंदा करती है, जिसमें उसने भारत और अन्य देशों को शामिल करके तथाकथित 'कट्टरपंथी शिया-सुन्नी धुरी' का मुकाबला करने के लिए एक क्षेत्रीय गठबंधन बनाने का इरादा जताया था।
प्रस्ताव में इस कदम को अंतरराष्ट्रीय कानून, संयुक्त राष्ट्र चार्टर और अंतरराष्ट्रीय न्यायालय (ICJ) की सलाहकार राय के विपरीत बताया गया है।
पाकिस्तानी सीनेट के सदस्यों ने मुस्लिम उम्माह की एकता और अखंडता को कमजोर करने के ज़ायोनी नेताओं के शर्मनाक प्रयासों पर भी आपत्ति जताई। उन्होंने फिलिस्तीन के कब्जे वाले क्षेत्रों की कानूनी और ऐतिहासिक स्थिति को बदलने वाले हर ज़ायोनी कदम की निंदा की, जिसमें पवित्र स्थलों की स्थिति, पश्चिमी तट, अवैध बस्तियों का विस्तार और अवैध सैटलर्स द्वारा की जाने वाली हिंसा को प्रोत्साहन शामिल है।
25 फ़रवरी 2026 - 14:06
समाचार कोड: 1785439
पाकिस्तानी सीनेट के सदस्यों ने एक प्रस्ताव पास करके ज़ायोनी प्रधानमंत्री के उस बयान की कड़ी निंदा की है, जिसमें उन्होंने मुसलमानों (शिया और सुन्नी दोनों) के खिलाफ गठबंधन बनाने की बात कही थी। सीनेट ने इस बयान को शर्मनाक बताया।
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