18 फ़रवरी 2026 - 15:23
सुप्रीम कोर्ट से हेट स्पीच देने वाले मुख्यमंत्री को राहत, टूट रही आखिरी उम्मीद

भारत के संविधान के आर्टिकल 32 को डॉ. बीआर अंबेडकर ने संविधान का दिल और आत्मा माना था, क्योंकि यह नागरिकों को अपने मौलिक अधिकारों की सुरक्षा के लिए सीधे सुप्रीम कोर्ट जाने का अधिकार देता है।

असम के मुख्यमंत्री द्वारा हेट स्पीच देने और भारतीय जनता पार्टी के सोशल मीडिया अकाउंट पर मुस्लिम विरोधी वीडियो शेयर करने से जुड़ी याचिका पर टिप्पणी की और याचिकाकर्ताओं को दिए गए निर्देश पर जमीयत उलेमा-ए-हिंद के अध्यक्ष मौलाना महमूद मदनी ने प्रतिक्रिया देते हुए चिंता व्यक्त की है। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के इस निर्देश को न्याय पसंद हलकों के लिए निराशाजनक कदम बताया है। 
हाल के दिनों में असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा द्वारा मुस्लिम समुदाय के खिलाफ लगातार विवादित बयान दिए गए और भारतीय जनता पार्टी के असम राज्य के सोशल मीडिया अकाउंट पर मुस्लिम विरोधी वीडियो शेयर किए। इन मामलों को लेकर सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई थी और मुख्यमंत्री के खिलाफ केस दर्ज करने का निर्देश देने और इन मामलों की जांच के लिए SIT की टीम गठित करने की मांग की गई थी, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं को हाईकोर्ट जाने का निर्देश दिया। 
मौलाना मदनी ने कहा कि भारत के संविधान के आर्टिकल 32 को डॉ. बीआर अंबेडकर ने संविधान का दिल और आत्मा माना था, क्योंकि यह नागरिकों को अपने मौलिक अधिकारों की सुरक्षा के लिए सीधे सुप्रीम कोर्ट जाने का अधिकार देता है। ऐसे मामलों में, जो हेट स्पीच, सांप्रदायिक सद्भाव और एक वर्ग के जीवन के अधिकार से जुड़े हैं, सुप्रीम कोर्ट को कड़े और स्पष्ट कदम उठाने चाहिए। बल्कि, खुद से कार्रवाई की उम्मीद है। 

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