कोर्ट के अगले आदेश तक यह क़ानून लागू नहीं होंगे। अदालत ने इन क़ानूनों पर चर्चा के लिए एक समिति का गठन भी किया है।
कोर्ट ने यह भी कहा है कि यह आदेश अनिश्चित काल के लिए नहीं है। कोर्ट ने कहा कि हमारा मक़सद एक सकारात्मक माहौल बनाना है।
हालांकि किसानों ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश का स्वागत करते हुए अपना आंदोलन ख़त्म करने से इनकार कर दिया है। किसान नेताओं का कहना था कि उनकी मांग इन विवादित क़ानूनों को रद्द करना है और जब तक सरकार इन्हें रद्द नहीं करती है, उनका आंदोलन जारी रहेगा।
किसानों ने कोर्ट द्वारा समिति के गठन का भी विरोध किया। सुनवाई के दौरान किसानों का पक्ष रख रहे वकील शर्मा ने बताया कि किसान संगठन सुप्रीम कोर्ट की ओर से समिति गठित किए जाने के पक्ष में नहीं हैं, और वह समिति के समक्ष नहीं जाना चाहते हैं। कोर्ट ने कहा कि अगर किसान, समस्या का समाधान चाहते हैं तो हम यह नहीं सुनना चाहते कि किसान समिति के समक्ष पेश नहीं होंगे।