इस्राईली अख़बार मआरीव ने बुधवार को अपनी रिपोर्ट में बताया कि इस्राईल में अब हूती आंदोलन के मिसाइल हमलों के विषय पर व्यापक रूप से चर्चा शुरू हो गई है।
इस्राईल में यह बहस भी छिड़ी हुई है कि इस्राईल और सऊदी अरब मिलकर हूती आंदोलन को अमरीका की ट्रम्प सरकार द्वारा आतंकी संगठन घोषित करवाने की कोशिश कर रहे हैं जिसके जवाब में हूती आंदोलन ईलात के इलाक़े पर मिसाइल हमला कर सकता है।
इस्राईली मीडिया का कहना है कि हाल ही में इस्राईल और सऊदी अरब के दो वरिष्ठ अधिकारियों ने वाशिंग्टन की यात्रा की है और हूती संगठन को आतंकी संगठन घोषित करवाने की कोशिशें तेज़ हो गई हैं मगर ट्रम्प सरकार को भीतरी सूत्रों से यह चेतावनी दी जा रही है कि हूती संगठन या अंसारुल्लाह आंदोलन को आतंकी संगठन घोषित करने के ख़तरनाक परिणाम निकल सकते हैं क्योंकि संयुक्त राष्ट्र संघ भी इसी संगठन की मदद से यमन में अपना काम कर पा रहा है।
हाल ही में इस्राईली मीडिया में यह ख़बर भी आई कि ईरान इस्राईली लक्ष्यों को ध्वस्त कर सकता है और इसके लिए वह यमन या इराक़ से बड़े मिसाइल या ड्रोन हमले करवा सकता है क्योंकि ईरान अपने परमाणु वैज्ञानिक मोहसिन फ़ख़्रीज़ादे की हत्या का इंतेक़ाम ज़रूर लेगा और इसी को देखते हुए इस्राईली सेना के विशेषज्ञों ने पिछले सप्ताह इस बात का जायज़ा लिया कि ईरान के संभावित हमलों में कौन से लक्ष्य ध्वस्त हो सकते हैं।
यमन के अंसारुल्लाह आंदोलन के पास इस्राईली इलाक़ों के भीतर विध्वंसक हमले करने की ताक़त और साहस दोनों है मगर इसकी वजह ईरान के परमाणु वैज्ञानिक की हत्या का इंतेक़ाम या अमरीका और इस्राईल के साथ बढ़ता ईरान का तनाव नहीं है बल्कि इसकी वजह यह है कि हालिया समय में यह तथ्य खुलकर सामने आया है कि यमन पर सऊदी अरब की जंग में इस्राईल बहुत गहराई तक शामिल है और यमन पर हो रहे हमलों में साथ दे रहा है।
इस्राईल के हाआरेत्ज़ अख़बार का कहना है कि अब लगता है कि इस्राईल ने यमन युद्ध में अपनी संलिप्तता से पर्दा उठाने का फ़ैसला कर लिया है। हूती संगठन के इंटेलीजेन्स विभाग के प्रमुख अब्दुल्लाह यहया हाकिम ने कहा कि सऊदी अरब जब यमन के ख़िलाफ़ अपनी जंग में नाकाम हो गया तो उसने अब इस्राईल से मदद लेनी शुरू कर दी।
उन्होंने कहा कि हम गहराई से जायज़ा ले रहे हैं और इस्राईल की गतिविधियों पर हमारी नज़र है। हाकिम ने कहा कि इस्राईल जब यमन युद्ध में कूदा है तो उसे इसका ख़मियाज़ा भुगतने के लिए भी खुद को तैयार कर लेना चाहिए।
इस्राईली हस्तक्षेप पर जवाबी हमले की पहली धमकी यमन के अंसारुल्लाह आंदोलन के प्रमुख सैयद अब्दुल मलिक हौसी ने दी थी।
उन्होंने लगभग एक साल पहले अपने भाषण में कहा था कि अगर इस्राईल ने यमन पर हमले में भाग लिया तो उस पर जवाबी हमला ज़रूर किया जाएगा।
इस्राईल ने ईलात के इलाक़े में मिसाइल डिफ़ेन्स सिस्टम तैनात करना शुरू कर दिया है तो यह समझ में भी आने वाली बात है लेकिन यहीं पर यह सवाल उठ रहा है कि यमन से ईलात की लंबी दूरी के बावजूद हमले की संभावना पैदा हो गई है तो इसका मतलब यह है कि अंसारुल्लाह आंदोलन अपनी मिसाइल ताक़त को काफ़ी विस्तार दे चुका है।
अंसारुल्लाह आंदोलन ने तो यहां तक एलान किया है कि तेल अबीब भी उनके निशाने पर है।
वैसे यह भी एक तथ्य है कि इस्राईल पर हमले के लिए अंसारुल्लाह को हो सकता है कि लंबी दूरी के मिसाइलों की ज़रूरत ही न पड़े क्योंकि लाल सागर में इस्राईली नौकाएं और जहाज़ों को वह बहुत आसानी से निशाना बनाकर इस्राईल को बहुत बड़ा नुक़सान पहुंचा सकता है।
कमाल ख़लफ़
फ़िलिस्तीनी पत्रकार