भारतीय किसान मोदी सरकार द्वारा लाए गए तीन नए कृर्षि क़ानूनों का विरोध कर रहे हैं, लेकिन ब्रिटिश प्रधान मंत्री इस मुद्दे से इतना अनजान दिखे कि उन्हें लगा कि यह भारत-पाकिस्तान के बीच का कोई मुद्दा है, इसलिए उन्होंने तुरंत सलाह दे डाली कि इसे दोनों देशों को द्विपक्षीय बातचीत के ज़रिए सुलझाना चाहिए।

ब्रिटिश संसद में लेबर पार्टी के सांसद तनमनजीत सिंह धेसी ने कहाः शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन कर रहे भारतीय किसानों के ख़िलाफ़, वाटर कैनन, आंसू गैस और बर्बरतापूर्ण ताक़त का इस्तेमाल किया जा रहा है, इस पर ब्रिटिश सरकार का क्या मत है और क्या ब्रिटिश प्रधान मंत्री, भारतीय प्रधानमंत्री को हमारी चिंताओं से अवगत करावायेंगे?
इस पर जॉनसन ने जवाब दियाः आप हमारी राय से अच्छी तरह वाक़िफ़ हैं, भारत और पाकिस्तान के बीच जो कुछ भी हो रहा है वह चिंताजनक है। यह एक विवादित मुद्दा है और दोनों देशों को मिलकर इसका समाधान निकालना चाहिए।
ब्रिटिश सांसद सिंह ने बोरिस जॉनसन के जवाब और दुनिया के इतने अहम मुद्दे से उनके अनजान रहने की आलोचना की है। उन्होंने ट्वीट करके कहाः अगर हमारे प्रधानमंत्री को पता होता कि वह किस बारे में बात कर रहे हैं तो अच्छा होता।
ब्रिटेन के अख़बारों ने इस ख़बर को ख़ूब मिर्च-मसाले के साथ प्रकाशित किया है। ट्वीटर पर भी लोग जॉनसन की जमकर आलोचना कर रहे हैं और उनका मज़ाक़ उड़ा रहे हैं।
भारतीय किसानों का विरोध प्रदर्शन मोदी सरकार के उन तीन कृषि क़ानूनों के ख़िलाफ़ है, जो हाल ही में पारित किए गए हैं। किसानों का मानना है कि यह उनके अधिकारों पर हमला है और मोदी सरकार बड़े व्यापारियों के हक़ में किसानों के ख़िलाफ़ साज़िश रच रही है।
इस मुद्दे का पाकिस्तान के साथ कोई लेना-देना नहीं है, बल्कि पूर्ण रूप से यह भारत और भारतीय किसानों से संबंधित है।