मैक्रां ने एक इंटरव्यू में यह टिप्पणी की। उन्होंने यूरोप के बारे में कहा कि यूरोप को अब अधिक स्वाधीन बनने की ज़रूरत है, अमरीका हमें उस समय तक घटक के रूप में स्वीकार नहीं करेगा जब तक हम खुद को गंभीरता से नहीं लेंगे और जब तक हमारे पास अपनी रक्षा रणनीति नहीं होगी।
मैक्रां इससे पहले यह टिप्पणी भी कर चुके हैं कि नैटो की क्लिनिकल डेथ हो चुकी है अब इस पर पुनरविचार करने की ज़रूरत है।
मैक्रां की इस टिप्पणी के बारे में टीकाकारों का कहना है कि अंतर्राष्ट्रीय मामलों में अब इस तरह अमरीका और पश्चिमी देश अपना वर्चस्व खोते जा रहे हैं कि उनके लिए अपनी नीतियों के अनुसार हालात को आगे ले जाना संभव नहीं है। इससे पहले यह देश सुरक्षा परिषद और अन्य अंतर्राष्ट्रीय संस्थाओं को में अपने रसूख़ का इस्तेमाल करके अपनी पसंद के फ़ैसले और प्रस्ताव हासिल कर लिया करते थे मगर अब ज़मीनी स्तर पर हालात इस तरह बदल गए हैं कि दुनिया बहुध्रुवीय व्यवस्था की ओर जा रही है तो साम्राज्यवादी देशों को अंतर्राष्ट्रीय संस्थाएं निर्रथक लगने लगी हैं।