8 अक्टूबर 2026 - 18:50
तुर्की की दो टूक, मक्का समझौता रक्षा के लिए है, हमले करने के लिए नहीं

युद्ध के सभी मोर्चों पर फैलने का असर काला सागर पर भी दिखाई दे रहा है और तुर्की इस संबंध में अपनी चिंताएं तथा चेतावनियां दोनों पक्षों तक पहुंचा रहा है।

अंकारा: यमन और सऊदी अरब के बीच बढ़ते तनाव के दौरान तुर्की के विदेश मंत्री हाकान फिदान ने कहा है कि “मक्का समझौता” एक रक्षात्मक समझौता है, आक्रामक नहीं। उन्होंने साफ किया कि इस समझौते के तहत तुर्की किसी दूसरे देश में अपनी सेना नहीं भेजेगा और न ही किसी दूसरे देश की धरती पर हमला करेगा।

तुर्की के विदेश मंत्री हाकान फिदान ने यह बात गुरुवार को अंकारा में हंगरी की उप प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री अनिता ओर्बान के साथ संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में कही। उन्होंने इस दौरान यूक्रेन युद्ध, काला सागर की स्थिति और मक्का समझौते से जुड़े मुद्दों पर बात की।

हाकान फिदान ने कहा कि रूस और यूक्रेन के बीच जारी युद्ध आज भी क्षेत्रीय और वैश्विक स्थिरता के लिए सबसे बड़े खतरों में से एक है।

उन्होंने कहा, “युद्ध की शुरुआत से ही हमने पूरी कोशिश की है कि यह संघर्ष काला सागर तक न फैले। मॉन्ट्रो समझौते को सही तरीके से लागू करना और काला सागर अनाज पहल इसी नीति के ठोस उदाहरण हैं।”

तुर्की के विदेश मंत्री ने चेतावनी देते हुए कहा कि अब युद्ध का असर काला सागर तक फैलता दिखाई दे रहा है। नागरिक जहाजों पर बढ़ते हमले क्षेत्र की मानवीय सुरक्षा, संपत्ति, समुद्री यातायात और पर्यावरण के लिए गंभीर खतरा पैदा कर रहे हैं।

उन्होंने कहा, “हमें किसी भी हालत में काला सागर को संघर्ष का नया मोर्चा बनने की अनुमति नहीं देनी चाहिए।”

फिदान ने आगे कहा कि युद्ध के सभी मोर्चों पर फैलने का असर काला सागर पर भी दिखाई दे रहा है और तुर्की इस संबंध में अपनी चिंताएं तथा चेतावनियां दोनों पक्षों तक पहुंचा रहा है।

उन्होंने बताया कि तुर्की के झंडे वाले जहाज, तुर्की के स्वामित्व वाले जहाज और तुर्की के कर्मचारियों वाले जहाज भी इस स्थिति से प्रभावित हुए हैं।

फिदान ने कहा कि तुर्की इस समस्या को खत्म करने के लिए हर संभव प्रयास कर रहा है। उन्होंने कहा कि इन हमलों से केवल जहाजों और उनके कर्मचारियों को ही नुकसान नहीं पहुंच रहा, बल्कि खास तौर पर अनाज जैसी वस्तुओं की अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक आपूर्ति प्रभावित होने से खाद्य सुरक्षा की समस्या भी पैदा हो रही है।

मक्का समझौते के बारे में हाकान फिदान ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि इसका उद्देश्य हमला करना नहीं, बल्कि रक्षा करना है।

उन्होंने कहा: “अगर इस समझौते में शामिल किसी देश पर हमला होता है, तो आप उसकी रक्षा के लिए उसके साथ खड़े होते हैं। यह कोई आक्रामक समझौता नहीं, बल्कि एक रक्षात्मक समझौता है। तुर्की किसी दूसरे देश की जमीन पर अपनी सेना नहीं भेजेगा और न ही वहां कोई हमला करेगा।”

उन्होंने यह भी बताया कि समझौते को संसद में भेजने के लिए जरूरी कानूनी तैयारियां लगभग पूरी हो चुकी हैं।

फिदान ने कहा कि तुर्की सरकार का इरादा है कि इस समझौते को जल्द से जल्द संसद के सामने पेश किया जाए। उन्होंने कहा कि इस संबंध में सरकार अपना काम लगभग पूरा कर चुकी है।

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