स्काई न्यूज़ के अनुसार एेसी दशा में कि जब शार्ली हिब्दू द्वारा पैग़म्बरे इस्लाम के अपमान जनक कार्टून के प्रकाशन पर दुनिया भर के मुसलमानों का आक्रोश ठंडा नहीं पड़ा है, फ्रांस के राष्ट्रपति एमानोइल मैक्रां ने इस अपमानजनक क़दम का फिर से समर्थन किया है।
मैक्रां ने एक बयान में कहा है कि फ्रांस अपने यहां अभिव्यक्ति की स्वंतत्रता पर केवल इस लिए अंकुश नहीं लगा सकता कि उससे विदेशों में हंगामे हो रहे हैं।
अपनी क्लास में पैग़म्बरे इस्लाम के अपमानजनक कार्टून को दिखाने के बाद एक टीचर की हत्या कर दी गयी थी जिस पर फ्रांस के राष्ट्रपति ने कहा था कि उनका देश अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का समर्थन जारी रखेगा जिसके बाद पूरी दुनिया में प्रदर्शन हुए थे जिसकी वजह से कुछ दिनों के लिए मैक्रां ने अपने बयान की सफाई दी और कहा कि उनका वह आशय नहीं था जो मीडिया में फैलाया गया लेकिन एक बार फिर उन्होंने अपना पुराना रुख दोहराया है।
फ्रांस के राष्ट्रपति ने यह बयान एेसी दशा में दिया है कि जब एम्नेस्टी इंटरनेश्नल ने अपने एक बयान में फ़्रान्स में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की स्थिति की समीक्षा करते हुए कहा है कि फ्रांस अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का उतना भी समर्थक नहीं है जितना वह स्वंय को दिखाना चाहता है। इस मानवाधिकार संस्था ने फ़्रान्स में सामने आने वाली घटनाओं और पैग़म्बर हज़रत मुहम्मद सल्लल्लाहो अलैहे व आलेही व सल्लम के अनादर का जायज़ा लेने के बाद कहा है कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के फ़्रान्स के दावे में सच्चाई नहीं है। एम्नेस्टी इंटरनेश्नल ने कहा है कि फ़्रान्स की एक अदालत ने पिछले साल दो लोगों द्वारा राष्ट्रपति एमानोएल मैक्रां का पुतला जलाए जाने को अनादर और अपमानजनक क़दम क़रार दिया था और मैक्रां उस समय संसद में ऐसा बिल पारित कराने के लिए परामर्श कर रहे थे जिसके अंतर्गत सोशल मीडिया पर फ़्रान्स के अधिकारियों के चित्रों के अनादर को अपराध क़रार दिया जा सके।