1 नवंबर 2020 - 12:38
इमारत को एफ़-35 फ़ाइटर जेट देने की डील...क़तर ने भी रख दी डिमांड...क्या होगी इस्राईल की प्रतिक्रिया? हथियारों के सौदों से इकानोमी संभाल रहा है अमरीका?

इस्राईल से शांति समझौता करके पूरे इस्लामी जगत में बदनामी उठाने वाले इमारात को अमरीका से पहले इनाम के रूप में एफ़-35 युद्धक विमानों की एक डील मिलने की संभावना हो गई है।

ट्रम्प प्रशासन ने कांग्रेस को सूचित किया है कि वह 50 अत्याधुनिक एफ़-35 युद्धक विमान इमारात को बेचना चाहता है। प्रतिनिधि सभा की विदेशी मामलों की समिति के पास इस डील का विरोध करने का अधिकार है क्योंकि इस समिति ने यमन युद्ध में इमारात की भूमिका और आम नागरिकों पर बमबारी में अमरीकी युद्धक विमानों के प्रयोग पर आपत्ति जताई है। मगर जब इस्राईली प्रधानमंत्री नेतनयाहू ने इस डील को ग्रीन सिग्नल दिया है तो इसका मतलब यह है कि वह रास्ते की रुकावटें दूर करवाने के लिए ज़ायोनी लाबी का रसूख़ इस्तेमाल करेंगे।

नेतनयाहू को अच्छी तरह पता है कि यह विमान कभी इस्राईल के ख़िलाफ़ इस्तेमाल नहीं किए जाएंगे बल्कि इमारात की नज़रें ईरान की बढ़ती ताक़त पर टिकी हुई हैं जबकि दूसरी ओर अमरीका ने इस्राईल को यह यक़ीन दिला दिया है कि इलाक़े में उसके सामरिक वर्चस्व को सुरक्षित रखेगा।

अमरीकी सामरिक उद्योग में एफ़-35 फ़ाइटर जेट सबसे महंगे हथियारों में गिने जाते हैं और एक विमान की क़ीमत लगभग 85 मिलियन डालर तक होती है जबकि उसके मेंटीनेन्स, पार्ट्स और प्रशिक्षण के अलग सौदे होते हैं।

क़तर ने भी अमरीका के सामने इन्हीं विमानों की डिमांड पेश कर दी है ताकि फ़ार्स खाड़ी के क्षेत्र में वह इमारात के बराबर बना रहे।

यहां एक विषय यह भी है कि क़तर के सामने यह शर्त रखी जा सकती है कि वह भी इमारात की तरह इस्राईल से शांति समझौता करे जिसके बाद ही युद्धक विमानों की डील हो सकेगी।

इस्राईली अख़बारों में यह ख़बरें लीक हो रही हैं कि इमारात, बहरैन और सूडान के बाद अब क़तर, मोरक्को, नाइजर, ओमान और माली की सरकारें इस्राईल से शांति समझौते करने की तैयारी कर रही हैं। मगर इस बारे में अब तक क़तर की ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है। क़तर के तुर्की और ईरान से बहुत गहरे संबंध हैं और दोनों देशों ने इस्राईल से अरब देशों के शांति समझौतों की कड़ी निंदा की है।

इस्राईल के ऊर्जा मंत्री युवाल स्टाइन्ज़ ने रोयटर्ज़ से कहा कि इस्राईल के विरोध के बावजूद क़तर को एफ़-35 फ़ाइटर जेट मिल सकते हैं। इस्राईल इसलिए इसका विरोधी है कि हमास संगठन और ईरान से क़तर के संबंध हैं।

दरअस्ल कोरोना वायरस की महामारी ने अमरीकी अर्थ व्यवस्था को भारी नुक़सान पहुंचा दिया है जिसके कारण हो सकता है कि वाशिंग्टन सरकार इस्राईल के विरोध को दरकिनार करते हुए क़तर को एफ़-35 युद्धक विमान बेच दे। कहते हैं कि इस्राईल तो इमारात को भी एफ़-35 युद्धक विमान बेचे जाने के पक्ष में नहीं था मगर तेल अबीब को अंदाज़ा हो गया था कि अमरीका आर्थिक संकट को देखते हुए यह डील करना चाह रहा है।

एक महत्वपूर्ण बिंदु यह है कि सारे समझौते ट्रम्प के शासन काल में आनन फ़ानन किए जा रहे हैं। अभी यह तय नहीं है कि अगर बाइडन चुनाव जीत गए तो अमरीका इन सौदों को पूरा करेगा या नहीं?

विमान के पुर्ज़ों और तकनीक से जुड़े सौदों को लेकर भी बहुत से सवाल हैं जिनके जवाब अभी स्पष्ट नहीं हैं