अमरीकी अख़बार वाशिंग्टन टाइम्स ने ईरान और भारत के बीच बढ़ते सहोयग के बारे में लिखा है कि दोनों देशों के बढ़ते रिश्ते, एशिया की भू-राजनीतिक व्यवस्था को बदलकर रख सकते हैं।
अमरीकी अख़बार की रिपोर्ट में उल्लेख किया गया है कि गुट पांच धन एक के साथ परमाणु समझौते के बाद हटने वाले प्रतिबंधों से लाभ उठाकर ईरान ने दक्षिण कोरिया और तुर्कमेनिस्तान जैसे देशों के साथ सुरक्षा समेत हर क्षेत्र में समझौते किए हैं।
इस रिपोर्ट में कहा गया है कि प्रतिबंधों के हटने के बाद जिन देशों से ईरान ने अपना सहयोग बढ़ाया है, उनमें सबसे उल्लेखनीय भारत है।
तेहरान और नई दिल्ली के बीच द्विपक्षीय सहयोग में तेज़ी से वृद्धि हो रही है और यह सहयोग इस प्रकार से आगे बढ़ रहा है कि एशिया की भू-राजनीतिक व्यवस्था को बदलकर रख सकता है।
दोनों देशों के बीच मज़बूत होते रिश्तों की स्पष्ट मिसाल भारत के प्रधान मंत्री नरेन्द्र मोदी की दो दिवसीय तेहरान यात्रा है।
इस यात्रा के दौरान दर्जन भर महत्वपूर्ण समझौतों पर हस्ताक्षर हुए और इसे मोदी व रूहानी ने दोनों देशों के संबंधों में एक नया अध्याय क़रार दिया।
वाशिंग्टन टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक़, इन समझौतों में से एक अहम समझौता चाबहार बंदरगाह का विकास है।
चाबहार परियोजना पर भारत 50 करोड़ डॉलर ख़र्च करेगा और दो टर्मिनलों का निर्माण करेगा, इससे भारत मध्य एशिया के बाज़ार तक आसानी से अपनी पहुंच बना लेगा।
यह समझौता एक प्रकार से स्ट्रैटिजिक तख़्तापलट के समान है। भारत अपनी भौगोलिक स्थिति एवं पाकिस्तान के साथ तनावपूर्ण संबंधों के कारण मध्य एशिया एवं अफ़ग़ानिस्तान तक सीमित पहुंच रखता था।
इस परियोजना के पूरा होने से भारत की यह मुश्किल आसान हो जाएगी और यह देश पाकिस्तान को नज़र अंदाज़ कर सकता है और सीधे तौर पर इन दो क्षेत्रों में अपना राजनीतिक एवं आर्थिक सहयोग बढ़ा सकता है।