विदेशमंत्री मुहम्मद जवाद ज़रीफ़ ने कहा कि सदैव यह आभास करता हूं कि यदि दबावों के सामने जनता का प्रतिरोध न होता तो हम भी डट नहीं सकते थे और राष्ट्र के दृष्टिकोण पेश नहीं सकते थे।
विदेश मंत्री ज़रीफ़ ने कर्बला की घटना में इमाम हुसैन के सेनापति हज़रत अब्बास अलैहिस्सलाम के शुभ जन्म दिवस के उपलक्ष्य में विदेशमंत्रालय में आयोजित कार्यक्रम में कहा कि यदि बलिदान की यह पवित्र संस्कृति जिसकी जड़ कर्बला में इमाम हुसैन और उनके भाई हज़रत अब्बास के साहस में दिखाई देती है, न होती तो वह शक्ति जो ईरान को क्षेत्र में शांति और सुरक्षा की स्थापना करने वाला, शक्तिशाली और प्रभावशाली देश बना कर पेश करती है, कभी भी नहीं मिल पाती।
श्री ज़रीफ़ ने ईरान की शक्ति और क्षमता को ईरानी जनता विशेषकर शहीदों और ईश्वर के मार्ग में घायल होने वालों के प्रतिरोध और बलिदानों का योगदान बताया और कहा कि मैं वार्ता की मेज़ पर सदैव यह आभास करता था कि यदि दबावों के सामने जनता का प्रतिरोध न होता तो हम भी डट नहीं सकते थे और राष्ट्र का सही नज़रिया पेश नहीं कर सकते थे। उन्होंने कहा कि विश्व शक्तियों के सामने देश की जनता का न झुकना, बलिदान और त्याग की संस्कृति की देन है।