स्वीडन की विदेशमंत्री मार्गोट वालस्ट्रोम ने कहा है कि स्वाधीन फिलिस्तीन को औपचारिक रूप से स्वीकार करना प्रजातंत्र और मानवाधिकार के आधार पर है।
उन्होंने रविवार को फ्रांस 24 टीवी चैनल से एक इंटरव्यू में स्वीडन की ओर से स्वाधीन फिलिस्तीनी देश को औपचारिकता दिये जाने पर इस्राईल के आक्रोश के बारे में पूछे गये एक सवाल के जवाब में यह बात कही। उन्होंने इसी प्रकार इस सवाल के जवाब में कि सऊदी अरब में महिलाओं की स्थिति पर आप की टिप्पणी से क्या सऊदी अरब और स्वीडन के व्यापारिक रिश्ते प्रभावित नहीं होंगे? कहा कि प्रजातंत्र और मानवाधिकार जैसे सिद्धान्तों के प्रति कटिबद्धता का मूल्य चुकाना पड़ता है। उन्होंने भूमध्य सागर से युरोप की ओर शरणार्थियों के बढ़ते तूफान के बारे में पूछे गये एक सवाल का उत्तर देते हुए कहा कि उनका देश, जर्मनी और इटली के भांति ही शरणार्थियों के लिए आकर्षण का मुख्य केन्द्र है। उन्होंने कहा कि 10 प्रतिशत युरोपीय देश, 90 प्रतिशत शरणार्थियों को स्वीकार करते हैं इस लिए इस संदर्भ में अन्य युरोपीय देशों को भी हाथ बंटाना चाहिए किंतु ब्रिटेन जैसे कुछ देश इस से दूर भागते हैं। याद रहे स्वीडन की सरकार ने 30 अक्तूबर 2014 में नयी सरकार के गठन के ठीक एक सप्ताह बाद स्वाधीन फिलिस्तीन देश के गठन को औपचारिकता दे दी जिससे नाराज़ होकर इस्राईल ने स्वीडन से अपने राजदूत को वापस बुला लिया था। स्वेडन के बाद फ्रांस, ब्रिटेन, स्पेन, आयरलैंड और युरोपीय संसद ने भी गत वर्ष एक एक करके , स्वाधीन फिलिस्तीनी देश के गठन को औपचारिक रूप से स्वीकार कर लिया।