ट्रंप: मैं ईरान के राष्ट्रपति से बातचीत के लिए तैयार हूं, ग़ज़ा के लोगों को वहां से निकल जाना चाहिए
अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में कहा कि वह ईरान के राष्ट्रपति के साथ बातचीत करने के लिए तैयार हैं। साथ ही, उन्होंने यह भी कहा कि ग़ज़ा के नागरिकों को वहां से निकल जाना चाहिए।
ट्रंप ने ग़ज़ा के हालात पर बोलते हुए सुझाव दिया कि इस इलाके को फिर से बसाया जाना चाहिए और वहां के निवासियों को कहीं और शिफ्ट कर देना चाहिए। उनके इस बयान पर कई देशों से तीखी प्रतिक्रियाएं आई हैं, खासकर अरब देशों और अंतरराष्ट्रीय संगठनों से, जिन्होंने इसे फिलिस्तीनी जनता के खिलाफ बताया है।
ईरान को लेकर ट्रंप का नरम रवैया चौंकाने वाला माना जा रहा है, क्योंकि अपने राष्ट्रपति कार्यकाल के दौरान उन्होंने तेहरान पर कड़े प्रतिबंध लगाए थे और परमाणु समझौते से अमेरिका को बाहर कर लिया था। अब उनका बातचीत के लिए तैयार होना एक नई रणनीति का संकेत दे सकता है।
अमेरिकी राष्ट्रपति की दोहरी नीति: बातचीत की पेशकश, लेकिन 'अधिकतम दबाव' की रणनीति बरकरार
अमेरिकी राष्ट्रपति एक तरफ ईरान से बातचीत की इच्छा जाहिर कर रहे हैं, तो दूसरी तरफ उस पर "अधिकतम दबाव" की नीति जारी रखने की बात भी कर रहे हैं। इस विरोधाभासी रुख के जवाब में ईरानी अधिकारियों ने कई बार स्पष्ट किया है कि वे किसी भी तरह के प्रतिबंधों और राजनीतिक दबाव के तहत बातचीत को स्वीकार नहीं करेंगे।
ईरान का यह स्टैंड पहले से ही साफ़ रहा है कि जब तक अमेरिका अपनी दबाव की नीति को नहीं छोड़ता, तब तक किसी भी तरह की बातचीत संभव नहीं होगी। अमेरिकी प्रशासन की यह रणनीति पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक हालात को और पेचीदा बना सकती है।
