इस्राईल में गहराते संकट और गृहयुद्ध की बढ़ती आशंका के बीच यहाँ से भागने वाले यहूदियों की तादाद में तेज़ी आ गई है। मिडिल ईस्ट आई की रिपोर्ट के मुताबिक़, इस्राईल में बढ़ते विरोध प्रदर्शन और टकराव के बीच देश के अलग अलग हिस्सों में रहने वाले यहूदियों के इस्राईल छोड़ कर जाने के चलन में तेज़ी आयी है। यहूदियों की एक बड़ी तादाद इस्राईल से निकलने के लिए तैयार है।
अरबी 21 की एक रिपोर्ट के मुताबिक़, एक कट्टर और ज़ायोनी इस्राईल का सपना लेकर दुनिया के अलग अलग देश से फिलिस्तीन में आकर बसने वाले यहूदी भी अब इस्राईल की हालत देख कर किसी दूसरे देश का पासपोर्ट हासिल करने की कोशिशों में जुट गए हैं ताकि ज़रूरत पड़ने पर उनके लिए किसी दूसरे देश में रहने का विकल्प बाक़ी रहे। इस्राईल छोड़ कर भागने और इस देश के विनाश और गृहयुद्ध के खतरे से डर कर भागने की दर में यह तेज़ी इसलिए भी चौंका रही है कि ज़ायोनी प्रधानमंत्री हालिया विरोध प्रदर्शन और संकट का कारण बने अदालती सिस्टम में बदलाव के क़ानून को वापस लेने का ऐलान भी कर चुके हैं।
मिडिल ईस्ट आई की रिपोर्ट के मुताबिक़, इस्राईल को छोड़ कर भागने वाले यहूदी किसी भी क़ीमत पर यहाँ से निकलना चाहते हैं हाँ वह मीडिया की सुर्ख़ियों में भी नहीं आना चाहते। इस रिपोर्ट में उनका तो ज़िक्र भी नहीं हुआ जो मौक़ा मिलने की सूरत में हमेशा के लिए यह जगह छोड़ने के लिए तैयार हैं।
ज़ायोनी लोगों में एक बड़ी तादाद है जो खुल कर इस मामले में बात करते हुए गर्व के साथ इस्राईल छोड़ने के लिए तैयार हैं जबकि कुछ लोग इसे निजी मामला बता कर चुप्पी साध लेते हैं। और खुल कर इस मामले में कुछ भी बोलना गवारा नहीं करते।
इस्राईल में पिछले कुछ वर्षो से रिवर्स माइग्रेशन में तेज़ी आई है। इस्राईल छोड़ कर भागने के बढ़ते चलन ने तल अवीव के अधिकारियों को गहरी चिंता में डाल दिया है। इस्राईल की अलग अलग सरकार में हर कैबिनेट ने फिलिस्तन के अलग अलग हिस्सों में अवैध आवासीय इकाईयां बना कर इन इलाक़ों में ज़ायोनी नागरिकों को बसाने के लिए फिलिस्तीनियों के खिलाफ ज़ुल्म की हर हद को पार कर दिया। इस्राईल ने इन इलाक़ों में यहूदियों को बहुसंख्यक बनाने के लये दुनियाभर से यहूदियों को समेत समेत कर बसाना शुरू किया लेकिन रिवर्स माइग्रेशन में आई तेज़ी और इस्राईल छोड़ कर भाग रहे यहूदियों के कारण ज़ायोनी सरकार के अरमानों पर पानी फिर गया और खुद ज़ायोनी सरकारी विभाग की रिपोर्ट के मुताबिक़ मक़बूज़ा फिलिस्तीन में अरबों और यहूदियों की आबादी तक़रीबन बराबर ही है। अभी तक फिलिस्तीन में दुनियाभर से लाए गए यहूदियों की आबादी भी अरबों की ही तरह 7 मिलियन है।
इसी लिए तल अवीव रिवर्स माइग्रेशन की मुश्किल से सख्ती से निपट रहा है और इस बारे में कोई आंकड़े भी जारी नहीं करता क्योंकि इस से उसके फिलिस्तीन के यहूदी करण के प्रोजेक्ट की हवा निकल जाएगी और वह इस देश के जनसांख्यिकी हिसाब को अपने हिसाब से नहीं बदल पाएगा और फिलिस्तीन की ऐतिहासिक स्थिति पर कोई फर्क नहीं पड़ेगा।
पिछले एक दशक तक इस्राईल से रिवर्स माइग्रेशन को देश के साथ विश्वासघात माना जाता था। यहाँ तक कि 1976 में तत्कालीन प्रधानमंत्री इस्हाक़ रोबिन ने ऐसे लोगों के लिए बेहद अपमानजनक शब्दों का इस्तेमाल किया था। लेकिन आज इस्राईल छोड़ कर भागने वाले लोगों में तादाद में बेतहाशा तेज़ी आई है। और इसे न अपमान जनक माना जा रहा है और न ही इस बारे में बात करते हुए कोई डर या झिझक देखी जा रही है।
जहाँ एक ओर यह रिवर्स माइग्रेशन इस्राईल को अंदर से खोखला कर रही है वहीं इस्राईल में लगातार 14 हफ़्तों से विरोध प्रदर्शन जारी हैं। हिब्रू मीडिया के मुताबिक़ कल भी तल अवीव में 175 हज़ार से ज़्यादा लोगों ने सड़कों पर उतरकर नेतन्याहू के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किये जिन्हे कुचलने के लिए पुलिस ने अपने घुड़ सवार दस्ते तैनात कर दिए हैं जो प्रदर्शनकारियों पर बर्बर तरीके से बल प्रयोग करते हुए उहे तीतर बितर करने की कोशिशों में लगे हुए हैं।