इस्लामी गणराज्य ईरान ने हमेशा अमेरिका को इस बात के लिए चेतावनी दी है कि वह क्षेत्र में अशांति पैदा करने से बचे। यह बात पूरी तरह साबित हो चुकी है कि पश्चिमी एशिया में इस समय जिस भी प्रकार का तनाव और अशांति है उसके लिए पूरी तरह अमेरिका और उसके सहयोगी ज़िम्मेदार हैं। वहीं ईरान ने हमेशा क्षेत्रीय देशों से अपील की है कि आपसी मतभेदों को हमे ख़ुद ही हल करना चाहिए, क्षेत्र के बाहर के देशों को हस्तक्षेप करने की इजाज़त नहीं दी जाना चाहिए। तेहरान लगतार इस संबंध में प्रयास भी कर रहा है। इस बीच ईरान ने आतंकी इस्राईल के सबसे बड़े समर्थक अमेरिका को कड़ी चेतावनी जारी कर दी है। जिसके बाद व्हाइट हाउस और तेलअवीव के अधिकारियों में हड़कंप मच गया है। क्योंकि वे जानते हैं कि ईरान अगर किसी बात को लेकर चेतावनी देता है तो वह केवल हवा में नहीं होती।
हज़रत ख़ातमुल अंबिया कंद्रीय वायु रक्षा छावनी के कमांडर मेजर जनरल ग़ुलाम अली रशीद ने कहा है कि कोई भी देश जो ईरान की राष्ट्रीय सुरक्षा को ख़तरे में डालने के लिए ज़ायोनी शासन के साथ सहयोग करता है, उसे उसके कार्यों के लिए अंजाम भुगतना पड़ेगा। जनरल ग़ुलाम अली रशीद ने कहा कि सशस्त्र बलों के जनरल स्टाफ़, सेना और आईआरजीसी, अमेरिका की सूचना, समन्वय और समर्थन के आधार पर इस्लामी गणराज्य ईरान के हितों और राष्ट्रीय सुरक्षा के ख़िलाफ़ ज़ायोनी शासन द्वारा किसी भी ख़तरनाक कार्यवाही पर पैनी नज़र रखे हुए हैं, अगर किसी भी तरह की कोई भी क़दम उठाया गया तो इसके ख़िलाफ़ सेना मुंहतोड़ जवाब देने के लिए पूरी तरह तैयार है। हज़रत ख़ातमुल अंबिया कंद्रीय वायु रक्षा छावनी के कमांडर ने बल देकर कहा है कि ईरानी राष्ट्र के इन दोनों दुश्मनों के बीच किस स्तर के संबंध हैं और कैसे यह आपसी सहयोग करते हैं यह बात किसी से भी ढकी-छुपी नहीं है। (RZ)
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