हम यह भूमिका इसलिए पेश कर रहे हैं कि हमें डेली एक्सप्रेस की रिपोर्ट के बारे में बात करनी है जो उसने जानकार सूत्रों के हवाले से छापी है कि ब्रिटेन की स्पेशल फ़ोर्स के 40 सैनिकों को जिनमें इलेक्ट्रानिक इंटैलीजेन्स के विशेषज्ञ शामिल हैं पूर्वी यमन के ग़ैज़ा एयरपोर्ट पहुंचाया गया है जो इस्राईली टैंकर पर हमला करने वाले ड्रोन विमानों को उड़ाने वाले यमनी सैनिकों को पकड़ने की कोशिश करेंगे। शायद बाद में कुछ और सैनिकों को भी उतारा जाए।
लगता है कि ब्रिटेन, इस्राईल और अमरीका की तिकड़ी अब इस्राईली टैंकर पर ड्रोन हमले के मामले में ईरान पर आरोप लगाने की अपनी योजना से पीछे हट रही है। शायद उन्हें यक़ीन हो गया है कि यह ड्रोन ईरान से नहीं बल्कि अंसारुल्लाह आंदोलन के नियंत्रण वाले यमनी इलाक़ों से उड़े थे।
यह बात अगर सही है तो यह अपने आप में बहुत बड़ी घटना है। अब इस्राईली टैंकर ही नहीं अमरीकी और ब्रितानी टैंकरों के लिए भी कड़ी वार्निंग सामने आ गई है। अंसारुल्लाह आंदोलन पहले भी कह चुका है कि वह इस्राईल के ख़िलाफ़ युद्ध का मोर्चा खोलने की रणनीति रखता है।
ओमान सागर में इस्राईली टैंकर पर हमला हो जाने का साफ़ मतलब यह है कि इस्राईल के सारे टैंकर अब ख़तरे में हैं। यह स्थिति इस्राईली अर्थ व्यवस्था को लंगड़ाने पर मजबूर कर देगी। कारण यह है कि इस्राईली आयात और निर्यात का 90 प्रतिशत भाग समुद्र के रास्ते से गुज़रता है।
अगर यह बात ठोस साक्ष्यों से साबित हो जाती है कि इस्राईली टैंकर पर हमला करने वाले ड्रोन यमन से उड़े थे तो इस्राईल, अमरीका और ब्रिटेन क्या बिगाड़ लेंगे? क्या यमन की नाकाबंदी करेंगे जो पहले से ही नाकाबंदी में है? क्या यमन पर एफ़-16 से बमबारी करेंगे जो सऊदी अरब पहले से ही कर रहा है?
सच्चाई यह है कि अमरीका अफ़ग़ानिस्तान में हार चुका है, इराक़ और सीरिया से भी उसे कुछ ही महीनों के भीतर निकलना पड़ेगा।
एक तरफ़ ओमान सागर में इस्राईली टैंकर पर ड्रोन हमला हो गया और दूसरी ओर लेबनान से इस्राईल के नियंत्रण वाले इलाक़ों पर मिसाइल बरसे, इस बीच सीरियाई मिसाइल इस्राईल के मिसाइलों को हवा में मार गिराने में सफल हो गए। यह सब इशारे हैं कि यह एक नया चरण शुरू हो चुका है और यह दौर इस्राईल के कराहने और दुनिया भर से पलायन करके फ़िलिस्तीन में जा बसने वाले ज़ायोनियों के वहां से बोरिया बिस्तर समेटने का चरण है।
अब्दुल बारी अतवान
अरब जगत के विख्यात लेखक व टीकाकार