इस्लामी क्रांति के वरिष्ठ नेता ने मंगलवार को राष्ट्रपति सैयद इब्राहीम रईसी को मिलने वाले जनादेश के अनुमोदन समरोह में राष्ट्रपति चुनाव में जनता की उपस्थिति को पूर्णरूप से अर्थपूर्ण और धार्मिक लोकतंत्र का प्रतीक क़रार दिया।
सुप्रीम लीडर ने जनादेश के अनुमोदन समरोह को संविधान पर निर्भर और इमाम ख़ुमैनी के हाथों शुरु किया जाना क़रार दिया और कहा कि यह समारोह, वास्तव में देश के संचालन और कार्यपालिका में बहुत ही अहम विषय का प्रतीक है।
इस्लामी क्रांति के वरिष्ठ नेता ने पूर्ण सुरक्षा और पारदर्शिता के साथ चुनाव के आयोजन की ओर संकेत करते हुए कहा कि काफ़ी समय से दुश्मनों के हल्क़ों में चुनावों के बहिष्कार की साज़िश पर काम हो रहा था और देश के भीतर भी कुछ लोगों ने निश्चेतना और कुछ लोग शायद कुछ मक़सद से इसी लाइन पर लग गये लेकिन राष्ट्र ने ठोस जवाब दिया और हालात तथा स्थिति के दृष्टिगत चुनाव में जनता की भरपूर भागीदारी रही।
सुप्रीम लीडर ने कार्यपालिका में सत्ता हस्तांतरण को आशावादी क़रार दिया और कहा कि नये और ताज़ा इरादे वालों के आने से सभी लोगों विशेषकर युवाओं को नई उम्मीद मिलेगी और उम्मीद ही बेहतरीन अवसर है।