इस भूमिका के बाद हम लेबनान में ईंधन के संकट की चर्चा करना चाहते हैं। अमरीकी और फ्रांसीसी योजना के तहत लेबनान पर आईएमएफ़ की शर्तें थोप दी गईं जिसके बाद ईंधन और अन्य ज़रूरी चीज़ों पर दी जाने वाली सरकारी सब्सिडी हटा ली गई। बस फिर क्या था इसके बाद भयानक संकट खड़ा हो गया।
अब ख़बरें आ रही हैं कि ईरानी तेल टैंकर बैरूत की बंदरगाह पर पहुंचने वाले हैं ताकि लेबनानी नागरिकों को ईंधन के संकट से निजात मिले। इस बीच बैरूत में अमरीकी राजदूत डोर्थी शिया और उनके ईरानी समकक्ष के बीच शाब्दिक झड़प भी हो गई।
अमरीकी राजदूत की यह हालत हो गई है कि मानो वह ख़ुद को लेबनान की प्रशासक समझने लगी हैं, हर मामले में उनकी दख़लअंदाज़ी ज़रूर होती है। स्थानीय टीवी चैनल को साक्षात्कार देते हुए उन्होंने कहा कि बैरूत की बंदरगाह पर ईरानी तेल टैंकर की खेप उतारने से समस्या हल नहीं होगी। उन्होंने कहा कि ईरान इस संकट का फ़ायदा उठाकर लेबनान पर अपना प्रभाव बढ़ाना चाहता है।
अमरीकी राजदूत का रायुल यौम के स्तर से हम यह जवाब देंगे कि लेबनान में विशेष रूप से ऊर्जा और बिजली के विभागों में जो भ्रष्टाचारी हैं उनको अमरीका का भरपूर समर्थन हासिल है।
दूसरी बात यह कि अगर अमरीका को ईरानी तेल इतना बुरा लग रहा है तो अपने घटक सऊदी अरब से वह क्यों नहीं कहता कि लेबनान को तेल की सप्लाई करे ताकि यह संकट ख़त्म हो।
तीसरी बात यह है कि अमरीका ने ही दबाव डालकर ईंधन और ज़रूरी वस्तुओं से सरकारी सब्सिडी ख़त्म करवाई है जिसका मक़सद देश की 80 प्रतिशत आबादी को परेशानी में डालकर हिज़्बुल्लाह के ख़िलाफ़ सड़कों पर लाना है ताकि हिज़्बुल्लाह के ख़तरे की ओर से इस्राईल बेफ़िक्र हो जाए।
चौथी बात यह है कि अमरीका को लगता है कि ईरान लेबनान के लिए ख़तरनाक है तो ख़ुद अमरीका ईरान से क्यों वार्ता कर रहा है। अमरीका तो 1040 में से 1000 प्रतिबंध ईरान से हटाने के लिए तैयार हो गया है। तो क्या हम यह समझें कि लेबनान को अमरीका बंधक के रूप में इस्तेमाल करना चाहता है।
पांचवीं बात यह है कि लेबनान में सरकार के गठन में अड़चनें अमरीका और फ़्रांस की ओर से डाली जा रही हैं।
अमरीकी राजदूत की हरकतें तो एसी हैं जैसे वह लेबनान में गृह युद्ध की आग भड़काने की कोशिश कर रही हैं। अमरीका ने अफ़ग़ानिस्तान, इराक़, लीबिया और सीरिया में यही किया है कि पहले संकट का ज्वालामुखी भड़काया और फिर वहां से भाग निकला।
हिज़्बुल्लाह के प्रमुख सैयद हसन नसरुल्लाह ने अपने हालिया भाषण में कहा कि ईरान से तेल इम्पोर्ट करने की सारी तैयारियां पूरी की जा चुकी हैं बस एक इशारे की देर है।
हम सैयद हसन नसरुल्लाह से अनुरोध करेंगे कि आप वह इशारा कर दीजिए ताकि ईरानी तेल टैंकर बैरूत की बंदरगाह पर लंगर डाले। यह लेबनान को बचाने का सबसे उचित और प्रभावी रास्ता है।
स्रोतः रायुल यौम