14 मार्च 2021 - 19:13
सुलग रहा है ईरान व इस्राईल के युद्ध का फलीता  क्या फिर से  शुरु हो चुकी है ईरान व इस्राईल के बीच मशहूर टैंकर वॉर? क्यों इस्राईल से नहीं  जीत सकता कोई युद्ध? रायुलयौम  की एक रिपोर्ट

लंदन से प्रकाशित होने वाले समाचार पत्र रायुलयौम ने ईरान व इस्राईल के बीच युद्ध की आंशका का जायज़ा लिया है।

नेतेन्याहू अरबों को दो शिविरों में बांटने में सफल हो गयेः इस्राईल से संबंध बनाने वाले और प्रतिरोध के मोर्चे में खड़े रहने वाले। अरबों बांटने के बाद अब एसा लग रहा है कि वह ईरान के साथ सैन्य टकराव की योजना बना रहे हैं ताकि इसका वह आगामी चुनाव में लाभ उठा सकें जैसा कि उनके हालिया एक बयान से यही साबित होता है। वह ईरान के परमाणु कार्यक्रम को बहाना बना रहे हैं और यह दावा कर रहे हैं कि वह यह अभियान अमरीकी मदद के बिना ही कर सकते हैं।

     बांटना, नेतेन्याहू का सब से प्रभावी हथकंडा है और सत्ता में बने रहने के लिए उन्होंने बार बार यह हथकंडा इस्तेमाल किया है और यह उनकी पुरानी नीति है। वह सन 1948 में अवैध अधिकृत फिलिस्तीन के बहुत से अरब दलों को तोड़ने में सफल हो गये इस तरह से उन्होंने अरब मोर्चे को कमज़ोर कर दिया। इस से पहले वह सन 1967 में अवैध अधिकृत क्षेत्रों में यही करने में सफल हुए थे। इस समय भी जार्डन के विभाजन की कोशिश कर रहे हैं वह पूर्वी जार्डन के लोगों और फिलिस्तीनियों में विभाजन चाहते हैं। जार्डन के क्राउन प्रिसं की मस्दिजुल अक्सा में नमाज़ का मामला उसी ड्रामे का हिस्सा है।

     वॉल स्ट्रीट जरनल ने अपनी एक रिपोर्ट में लिखा है  और इस्राईली सरकारी सूत्रों ने उसकी पुष्टि भी की है कि इस्राईली नौसेना की युनिटों ने गत दो वर्षों के दौरान ईरान का तेल ले जाने वाले 12 तेल वाहक जहाज़ों को निशाना बनाया है जिसका अंतिम मामला पिछले हफ्ते था। इस रिपोर्ट से ही पता चलता है कि नेतेन्याहू आंशिक या व्यापक सैन्य टकराव के प्रयास में हैं ताकि सत्ता में वह अधिक दिनों तक रह सकें।

     अगर नेतेन्याहू ने ईरान के साथ इस प्रकार के किसी युद्ध की योजना बनायी तो निश्चित रूप से यह उनके जीवन की सब से बड़ी गलती होगी क्योंकि यह दांव उन्हें उल्टा पड़  सकता है यही नहीं उनके घटक अमरीका को भी भारी पड़ सकता है जो इस समय बुरी तरह से फंसा हुआ है और अफगानिस्तान व इराक़ से निकलने के लिए हाथ पैर मार रहा है जबकि उसके सामने रूस, चीन, ईरान और उत्तरी कोरिया का मज़बूत मोर्चा तेज़ी से बन रहा है।

 

     इस्राईल पांच लाख से अधिक मिसाइलों से घिरा हुआ है और इन सभी मिसाइलों का निशाना बेहद सटीक है। इसी तरह यदि युद्ध हुआ तो सब न सही मगर अधिकांश जलमार्ग खतरनाक हो जाएंगे और शायद दो हफ्ते पहले ओमान की खाड़ी में जो इस्राईली जहाज़ पर हमला हुआ था वह इस्राईली हमलों के जवाब का आरंभ भी हो सकता है।

     ईरान और यमन, लेबनान और इराक़ में उसके घटक, लाल सागर, भूमध्य सागर, परशियल गल्फ और उससे संबंधित संगठन, हुरमुज़ स्ट्रेट, बाबुल मंदब स्ट्रेट और ओकबा खाड़ी पर छाए हैं और जो ओमान की खाड़ी में इस्राईली जहाज़ पर हमला कर सकता है वह अन्य जगहों पर भी दूसरे जहाज़ों को निशाना बना सकता है। यहां पर हम आप को याद दिलाना चाहेंगे कि किस तरह से सन 2006 के युद्ध में हिज़्बुल्लाह ने बैरुत पर गोलाबारी करने वाले एक इस्राईली युद्धपोत को सटीक निशाना लगा कर तबाह कर दिया था।

     एक और बात यह है कि इस्राईल को तेलवाहक जहाज़ों के इस युद्ध में जीत मिलने की कोई संभावना नहीं है अगर यह युद्ध शुरु हो गया तो।  यह जो नेतेन्याहू कुछ दिन पहले यह कह रहे थे कि वह सीरिया में ईरान को पैर नहीं जमाने देंगे और उसे परमाणु हथियार भी नहीं बनाने देंगे और इसके लिए चाहे जो क़ीमत अदा करना पड़े तो यह चुनावी जुमला है क्योंकि इस्राईल तीन साल से सीरिया में हमले कर रहा है लेकिन इससे न तो ईरान की उपस्थिति कम हुई और न ही उससे संबंधित संगठनों की वहां गतिविधियों पर कोई असर पड़ा बल्कि अब तो उनकी संख्या बढ़ भी गयी है।

     ईरान के जल परिवहन विभाग के एक अधिकारी ने स्वीकार किया है कि उसके एक तेल वाहक जहाज़ पर भूमध्य सागर में हमला किया गया है और  इस तरह की अभूतपूर्व स्वीकारोक्ति ईरान की तरफ से जवाबी कार्यवाही का औचित्य दर्शाने के लिए हो सकती है।

     हालिया सर्वे रिपोर्टों से पता चलता है कि नेनेत्याहू को चुनाव में इतना वोट नहीं मिलेगा जिससे वह सरकार का गठन कर लेंगे तो फिर उनके सामने दो ही रास्ते रह जाएंगे जिनमें  से एक पर भी चलना वह पसंद नहीं करेंगे, या पांचवीं बार चुनाव का आयोजन हो या जेल जाएं, वैसे हम उनके लिए दूसरे मार्ग में अधिक बेहतर समझते हैं।