26 जनवरी 2021 - 19:21
दाओस में बाइडन को नज़रअंदाज़ करके चीनी राष्ट्रपति ने अपनाया वैश्विक लीडर का अंदाज़...क्या नए रूप में शीत युद्ध शुरू हो चुका है? अमरीकी राष्ट्रपति के सामने तीन बेहद कठिन लक्ष्य

वाइट हाउस में नियुक्तियों का दौर पूरा हो गया और 25 हज़ार सुरक्षाकर्मियों ने राजधानी को किसी भी बड़ी अप्रिय घटना से बचाए रखा तो अब अमरीका के नए राष्ट्रपति जो बाइडन के बारे में कहा जा सकता है कि उनके सामने तीन बहुत बड़ी चुनौतियां हैं।

1 आंतरिक हालात को संभालना और लोकतांत्रिक व्यवस्था में लोगों का विश्वास बहाल करवाना, कोरोना महामारी का कोई बुनियादी हल तलाश करना, अमरीकी अर्थ व्यवस्था को गंभीर संकट से बाहर निकालना और छह करोड़ बेरोज़गारों के लिए नौकरी का बंदोबस्त करना।

2 विश्व स्तर पर अमरीका की दबंगई को बहाल करना, अंतर्राष्ट्रीय गठबंधनों को फिर से मज़बूत करना, मध्यपूर्व को विस्फोटक बनाकर जाने वाले ट्रम्प की इस भयानक ग़लती का सुधार करना, ईरान के परमाणु कार्यक्रम के मामले को हल करना और अपने भयभीत घटकों को आश्वस्त करना।

3 चीन की तेज़ी से बढ़ती आर्थिक और टेक्नालोजी की ताक़त से निपटना जो रूस के साथ मज़बूत एलायंस बनाने की दिशा में बढ़ रहा है। यही नहीं चीन पश्चिमी एशिया, पूर्वी एशिया, मध्य एशिया, अफ़्रीका और लैटिन अमेरिका तक अपने एलायंसों का दायरा बढ़ा रहा है।

शुरू के दो बिंदुओं को फ़िलहाल किनारे रखते हैं और तीसरे बिंदु पर चर्चा को केन्द्रित करते हैं। इस घटना ने सबका ध्यान अपनी ओर खींचा कि चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने दाओस में अंतर्राष्ट्रीय आर्थिक फ़ोरम को संबोधित करते हुए वैश्विक नेता का अंदाज़ अपनाया। उन्होंने बाइडन का नाम तक नहीं लिया, बस इतना कहा कि अगर अमरीका और चीन के बीच शीत युद्ध छिड़ गया तो सभी पक्षों को इसका बहुत नुक़सान होगा।

चीनी राष्ट्रपति बहुत मज़बूत अंदाज़ में अपनी बात रख रहे थे। इसकी वजह भी है क्योंकि इस समय जब अमरीकी अर्थ व्यवस्था की विकास दर कोरोना वायरस की महामारी के कारण शून्य के क़रीब पहुंच रही है तो चीन ने 2020 में 2.3 प्रतिशत की रफ़तार से तरक़्क़ी की है। नए साल में चीन की विकास दर और भी बढ़ने वाली है। अब चीन सारी दुनिया में सबसे अधिक विदेशी निवेश आकर्षित करने वाला देश बनता जा रहा है। हद तो यह हो गई है कि वैज्ञानिक और सामरिक क्षेत्रों में भी चीन में विदेशी निवेश तेज़ी से बढ़ रहा है।

ट्रम्प ने अपने चार साल के शासन काल में चीन के ख़िलाफ़ बहुत बयानबाज़ी की और खुलकर धमकियां दीं लेकिन इस नीति के उल्टे परिणाम निकले। चीन ने इसके जवाब में कोरोना वायरस को भी कंट्रोल किया और साथ ही अपनी अर्थ व्यवस्था भी मज़बूती और महारत से संभाली।

अमरीका के सामने चीन के रूप में इस समय बिल्कुल नए प्रकार की महाशक्ति है जिसका मुक़ाबला वह सोवियत संघ से शीत युद्ध के दौरान अपनाए गए हथकंडों से करना चाहता है।

चीन विश्व नेता बनने की राह पर चल पड़ा है। उसने दो बड़े ठोस क़दम उठाए हैं। एक तो उसने डालर की जगह युवान को बढ़ावा देना शुरू कर दिया है और दूसरा क़दम यह है कि उसने रूस के साथ मिलकर नई अंतर्राष्ट्रीय वित्तीय व्यवस्था खड़ी करने का काम भी शुरु कर दिया है।

हमें नहीं मालूम कि राष्ट्रपति बाइडन किस तरह इन चुनौतियों से निपटेंगे। वह कोई करिश्माती नेता नहीं रहे और न ही उनकी उम्र अब उन्हें कोई बड़ा दांव खेलने की अनुमति देगी।

वाइट हाउस की प्रवक्ता ने कहा कि उनके गुरु बाइडन संयम के मार्ग पर चलने वाले इंसान हैं, कभी धमकी की भाषा नहीं बोलते। इसका मतलबा यह है कि बाइडन के बास ठोस रणनीति का अभाव है।

अब्दुल बारी अतवान

अरब जगत के विख्यात लेखक व टीकाकार