10 जनवरी 2021 - 15:43
ईरान पर हमले से निराश हुए ईरान के दुश्मन, अमरीकी हमले से ईरान नहीं, अमरीका ईरान के हमले से डर रहा है, सऊदी समाचारपत्र का चौंकाने वाला विश्लेषण

सऊदी अरब से निकट समाचार पत्र अलअरब ने ईरान के खिलाफ अमरीका की संभावित कार्यवाही पर निराशा प्रकट करते हुए कई महत्वपूर्ण बिन्दुओं का उल्लेख किया है।

गत चार वर्षों के दौरान, ईरान और अमरीका के बीच संबंधों में शांति कभी नहीं रही इसी तरह जो बाइडन की समझौते में वापसी से भी कोई खास फर्क पड़ने वाला नहीं है।

हालांकि उम्मीद की जा रही है कि बाइडन, ईरान के साथ संबंध सुधारेंगे लेकिन जिस तरह से हालात थे, वह बेहद खतरनाक हैं और यहां तक कहा जाने लगा कि ट्रम्प के सत्ताकाल से पहले ईरान और अमरीका एक दूसरे से टकरा सकते हैं।

     नये वर्ष के आरंभ से पहले, अमरीका ने अपने बमवर्षक विमान परशियन गल्फ भेजा जिसके बाद पिछले सोमवार को ईरान न सिर्फ यह कि 20 प्रतिशत संवर्धन आरंभ करने का एलान किया बल्कि दक्षिणी कोरिया का एक तेलवाहक जहाज़ भी रोक लिया। ईरान ने यह सब जब किया था तो ट्रम्प की सत्ता के मात्र दो हफ्ते बचे थे लेकिन यूरेनियम के संवर्धन में वृद्धि के एलान और दक्षिणी कोरिया के तेलवाहक जहाज़ को रोकने के बाद हालात ऐसे  बन गये कि जिसमे एक चिंगारी ही युद्ध की आग भड़काने के लिए काफी थी।

     लेकिन अब मैथ्यू ली और लोलिता सी बेल्डोर जैसे विश्लेषकों का कहना है कि ऐसा कोई चिन्ह नहीं है जिससे पता चलता हो कि अमरीका, ईरान पर हमले की योजना बना रहा है बल्कि अमरीका को यह चिंता है कि कहीं ईरान, इराक़, फार्स की खाड़ी या कहीं और कोई हमला शुरु न कर दे जिसकी वजह से ट्रम्प, उसका उत्तर ज़रूर देंगे और इस तरह से युद्ध शुरु हो जाएगा।

     मैथ्यू ली का कहना है कि अमरीका का विमानवाहक युद्धपोत जो अब तक इलाक़े में रुका है उसकी वजह से भी चिंता है।

     अमरीकी विमानवाहक युद्धपोत, नीमित्ज़ की परशियन गल्फ से वापसी के विषय पर कई  हफ्तों तक विचार किया गया। कार्यक्रम यह था कि नये साल से पहले यह विमानवाहक युद्धपोत, अमरीका वापस हो जाए लेकिन फिर अफगानिस्तान, इराक़ और सोमालिया से अमरीकी सैनिकों की वापसी की वजह से, इस फैसले को नीमित्ज़ की तैनाती को बढ़ा दिया गया।

      गत दिसंबर में ईरान के साथ तनाव बढ़ने के साथ ही सेंट्रल कमान ने फैसला किया कि नीमित्ज़ को कहीं निकट ही रोके रखा जाए और फिर साल के अंतिम दिनों में मिलर ने एलान किया कि अमरीका अपने विमानवाहक युद्धपोत को  वापस बुला रहा है लेकिन उसके तीन दिन बाद कहा गया कि नीमित्ज़ फार्स की खाड़ी में ही रहेगा।

     नीमित्ज़ को परशियन गल्फ में बाकी रखने के एलान के बाद जिस तरह से अमरीकी रक्षा अधिकारी चौंक गये थे उससे पता चलता है कि यह फैसला पेंटागन में नहीं बल्कि वाइट हाउस में किया गया था।

     अमरीका की मासाचोसेट यूनिवर्सिटी में राजनीतिक मामलों के विशेषज्ञ, विपिन नारंग का कहना है कि परशियन गल्फ में नीमित्ज़ की तैनाती को जारी रखना, अमरीका की शक्ति का चिन्ह होने से अधिक, वाशिंग्टन में हंगामों की वजह से पैदा होने वाली कमज़ोरी का सुबूत है यहां तक कि हालत यह है कि यह अमरीका के खिलाफ हमला करने का हर दुश्मन के लिए सब से अच्छा अवसर है। नारंग के विचार में अमरीका की ओर से किसी कार्यवाही की संभावना बहुत कम है।

     बहुत  से टीकाकारों का मानना है कि बाइडन की सरकार को बहुत से मतभेद, झड़पों और तनावों को खत्म करना होगा विशेषकर उस समय जब वह ईरान के बारे में अमरीकी नीतियों में बदलाव लाना चाहेगी।

     सब से पहले बाइडन को यह जानना चाहिए कि इस्राईल, सऊदी अरब और यूएई को ईरान के सिलसिले में अमरीका की गतिविधियों पर भरोसा होना चाहिए ताकि इन तीन सरकारों का व्यवहार, अमरीकी रणनीति में जटिलता न पैदा करें।

     भविष्य में अमरीका की नयी सरकार, ईरान के परमाणु कार्यक्रम को अधिक सीमित करने की ज़रूरत तो  महसूस करती है लेकिन वह यह नहीं चाहती कि परमाणु कार्यक्रम के बारे में होने वाले समझौते को ईरान के बैलिस्टिक मिसाइल से जोड़ दे।

     इन तीनों सरकारों को यह चिंता है कि ईरान के साथ वार्ता के दौरान बाइडन सरकार के हित कहीं इस बात का कारण न बनें कि वह पड़ोसियों के लिए ईरान के " खतरे" को नज़रअंदाज़ कर दें।