8 जनवरी 2021 - 18:14
दुश्मन ईरान की शक्ति से हैरान है, उसके सारे समीकरण बिगड़ गये, दुश्मनों में यह हिम्मत नहीं है कि वह ईरान की ओर मैली नज़र से देख सकें...

इस्लामी क्रान्ति के वरिष्ठ नेता ने क़ुम की जनता को संबोधित करते हुए हालिया कुछ दिनों में होने वाली अहम घटनाओं पर प्रकाश डाला।

ईरान के नेश्नल टेलीवीजन से प्रसारित होने वाले यह भाषण, 1977 को, इमाम ख़ुमैनी के नेतृत्व में शाही शासन व्यवस्था के ख़िलाफ़ पवित्र नगर क़ुम की जनता के आंदोलन के दौरान घटी रक्तरंजित घटना की बरसी के उपलक्ष्य में था।

इस्लामी क्रांति के वरिष्ठ नेता ने अपने संबोधन में कहा कि सबसे पहले ईश्वर की प्रशंसा और फिर देश की जनता का आभार व्यक्त करता हूं जिसने शहीद क़ासिम सुलैमानी की बरसी पर महाकाव्यात्मक आंदोलन को वजूद दिया।

उनका कहना था कि पूरे देश में जनता का ख़ुद से प्रेरित व्यवहार शहीद सुलैमानी और शहीद अबू महदी अलमुहन्दिस की झलक पेश कर रहा था। लोगों के इस महाआंदोलन से देश के ढांचे और राष्ट्र में ताज़ा जान पड़ गयी।

वरिष्ठ नेता ने कहा कि किसी निर्देश और सर्कुलर से ऐसा आंदोलन वजूद में नहीं आ पाता जैसा शहीद सुलैमानी और शहीद अबू महदी अलमुहन्दिस की बरसी पर नज़र आया। ये, जनता के मन में इन हस्तियों की पहचान और उनके प्रति लगाव का नतीजा था।

बग़दाद सहित इराक़ के अनेक शहरों में शहीद अबू महदी अलमुहन्दिस और इराक़ी जनता के मेहमान शहीद क़ासिम सुलैमानी को उनकी बरसी पर श्रृद्धांजलि देने के लिए जिस तरह लोग सड़कों पर आए, वह हैरत में डालने वाला मंज़र था। इन सभाओं में शामिल होने वालों का में दिल की गहराई से शुक्रिया अदा करता हूं।

उन्होंने 19 दय की बरसी पर शाही शासन के ख़िलाफ़ क़ुम की जनता के ऐतिहासिक आंदोलन का ज़िक्र करते हुए कहा कि 19 दय की तारीख़ अमरीकी साम्राज्य पर बड़ा हथौड़ा था। यह आंदोलन जारी रहा और आज आप इस साम्राज्य का हाल देख रहे हैं। उसके मानवाधिकार की हालत, जहाँ हर कुछ घंटे में या कम के कम हर दिन एक अश्वेत की बिना किसी जुर्म के हत्या होती है, देख रहे हैं। यह अमरीकी मूल्य हैं जो उन्हें मुंह चिढ़ा रहे हैं। उनकी अर्थव्यस्था भी ख़राब है। इससे ज़्यादा हैरत की बात यह है कि अभी भी ख़ुद के अगुवा होने का दावेदार अमरीका है।

वरिष्ठ नेता ने कहा कि आज सोशल मीडिया के द्वारा दुश्मन वास्तविकताओं को बदलने और उनकी नयी व्याख्या करने में व्यस्त हैं। दुनिया की महत्वपूर्ण घटनाओं पर दुश्मन की जासूस संस्थाएं नज़र रखती हैं और ज़बान, क़लम, लेखों और दुनिया के प्रसिद्ध लोगों के विचारों द्वारा अपन दृष्टिगत घटनाओं की व्याख्या करते हैं।

इस्लामी क्रांति के वरिष्ठ नेता ने कहा कि हाल ही में मैंने एक किताब पढ़ी, उस किताब को एक अमरीकी ने लिखा था, उक्त किताब में दुनिया के प्रसिद्ध संचार माध्यमों और मीडिया पर अमरीका की ख़ुफ़िया एजेन्सी सीआईए के वर्चस्व की बात कही गयी थी।

उनका कहना था कि सीआईए इस काम से लोगों में अपनी ग़लत विचारधारा फैलाती है और उनको गुमराह करती है, यह ख़तरा हमेशा पाया जाता है।

इस्लामी क्रांति के वरिष्ठ नेता आयतुल्लाहिल उज़मा सैयद अली ख़ामेनेई का कहना था कि क़ुम की जनता की क्रांति से एक सप्ताह पहले, अमरीकी राष्ट्रपति ने शाही सरकार और मुहम्मद रज़ा शाह के सौ प्रतिशत समर्थन का एलान किया था, इसीलिए क़ुम की क्रांति, अमरीका के विरुद्ध एक क्रांति थी, साम्राज्य के विरुद्ध एक आंदोलन था।

वरिष्ठ नेता ने कहा कि आज हम अमरीका का हाल देख रहे हैं, यही उनका लोकतंत्र है, यही उनका चुनावी मुखौटा है, यह उनका मानवाधिकार है कि हर एक घंटे पर, हर कुछ दिन में एक अश्वेत को सड़क पर मार देते हैं, हत्यारे को पकड़ते भी नहीं।

वरिष्ठ नेता ने कहा कि यह अमरीका की कमर टूटी अर्थव्यवस्था है, वास्तव में अमरीका की अर्थव्यवस्था की कमर टूट चुकी है, आश्चर्य की बात यह है कि अब भी कुछ लोगों का क़िबला अमरीका ही है।

इस्लामी क्रांति के वरिष्ठ नेता का कहना है कि वर्तमान समय में अमरीका क्षेत्र में अस्थिरता को अपने हित में समझता है और इस बात को वह कई बार कह भी चुका है ताकि वह ख़ुद को क्षेत्र पर पूरी तरह हावी कर सके।

उनका कहना था कि अमरीकी थिंकटैंक के एक प्रसिद्ध विशेषर ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि हम ईरान, इराक़, सीरिया और लेबनान में शांति के इच्छुक नहीं हैं, अस्ल मुद्दा इन देशों में शांति और अशांति का नहीं है बल्कि अस्ल मामला यह है कि इस प्रकार अपनी दृष्टिगत अस्थिरता पैदा की जाए।

इस्लामी क्रांति के वरिष्ठ नेता आयतुल्लाहिल उज़मा सैयद अली ख़ामेनेई का कहना था कि हम अमरीका की अस्थिरता फैलाने की नीति के सामने डट गये।

उनका कहना था कि पश्चिमी मोर्चे और हमारे दुश्मनों की यह ज़िम्मेदारी है कि वह अपनी इस दुष्टता को अर्थात ईरानी जनता पर प्रतिबंध लगाने की प्रक्रिया को तुरंत ख़त्म करें, यह विश्वासघाती और दुष्टता पर आधारित क़दम है, यह ईरानी राष्ट्र से बड़ी और दिशाहीन दुश्मन है।

इस्लामी क्रांति के वरिष्ठ नेता का कहना था कि मान लीजिए कि प्रतिबंध न हटें, अलबत्ता प्रतिबंधों का प्रभाव धीरे धीरे ख़त्म हो जाएगा, हम को देश की अर्थव्यवस्था के लिए ऐसा कार्यक्रम बनाना चाहिए जो प्रतिबंधों के लगने या हटने से प्रभावित न हो।

इस्लामी क्रांति के वरिष्ठ नेता आयतुल्लाहिल उज़मा सैयद अली ख़ामेनेई का कहना था कि आज हमारी रक्षा शक्ति ऐसी है जिसने दुश्मनों के सारे समीकरणों को बिगाड़कर रख दिया है।

उनका कहना था कि ईरान के मीज़ाइल ने जब देश की वायुसीमा में घुसने वाले अमरीकी ड्रोन को मार गिराया और इराक़ में अमरीका की एनुल असद छावनी को तबाह कर दिया, तब दुश्मनों के सारे समीकरण बिगड़ गये।