9 दिसंबर 2020 - 17:45
ट्रम्प के 'पसंदीदा तानाशाह' को मैक्रॉन के रूप में अब एक नया दोस्त मिल गया

फ़्रांसीसी राष्ट्रपति इमानुएल मैक्रॉन ने मानवाधिकारों के खुलेआम उल्लंघन के लिए मिस्र के नए तानाशाह अब्दुल-फ़तह अल-सीसी को कटघरे में खड़ा करने का अवसर खो दिया है।

मानवाधिकार समूहों के कड़े विरोध के बावजूद, मैक्रॉन ने मिस्र के सैन्य राष्ट्रपति को आधिकारिक यात्रा के लिए आमंत्रित किया। सोमवार को एलिसी पैलेस में अल-सीसी के साथ एक संयुक्त संवाददाता सम्मेलन के दौरान उन्होंने कहा कि फ़्रांस मिस्र के साथ आर्थिक सहयोग (हथियारों की बिक्री) को मानवाधिकारों के साथ सशर्त नहीं करेगा।

इसके बजाए, आतकंवाद के ख़िलाफ़ मिस्र के प्रयासों के बारे में मैक्रॉन ने बात की और वह यह भूल गए कि सीसी की सरकार, आतंकवाद के ख़िलाफ़ लड़ाई के बहाने बड़े पैमाने पर मानवाधिकार कार्यकर्ताओं, पत्रकारों और अपने राजनीतिक प्रतिद्वंद्वियों को निशाना बना रही है।

2013 में सत्ता पर क़ब्जा करने के बाद से सीसी ने मानवाधिकारों जमकर धज्जियां उड़ाई हैं, जो मिस्र के मानकों से भी कहीं अधिक है। एमनेस्टी इंटरनेशनल और ह्यूमन राइट्स वॉच ने इसके विस्तृत दस्तावेज़ पेश किए हैं। की सरकार ने राजनीतिक विरोधियों, पत्रकारों, आलोचकों और अधिकार कार्यकर्ताओं के खिलाफ निरंतर अभियान चलाया है। हज़ारों लोगों को जेलों में ठूस दिया गया है, कई को बहुत अधिक यातनाएं दी गई हैं और जेलों में सामूहिक रूप से फांसी दी गई है तथा पुलिस हिरासत में संदिग्ध मौतें हुई हैं।

इस बीच, फ़्रांसीसी राष्ट्रपति मैक्रॉन की सिर्फ़ यह कोशिश है कि वह फ़्रांस को एक बार फिर मिस्र को सबसे अधिक हथियार बेचने वाला देश बना दें और अपने कट्टर विरोधी तुर्क राष्ट्रपति रजब तैयब अर्दोगान के मुक़ाबले में ढाल के रूप में इस्तेमाल करें। क्योंकि अर्दोगान से सीसी को भी काफ़ी शिकायतें हैं, जैसे कि मुस्लिम ब्रदरहुड का समर्थन और लीबिया के गृहयुद्ध में हस्तक्षेप।

मैकॉन के लिए सीसी को दोस्त घोषित करने के लिए इतना ही काफ़ी था। हालांकि यह अमरीकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रम्प की उस गर्मजोशी की बराबरी नहीं है, जो सीसी को अपना "पसंदीदा तानाशाह" कहते हैं। इससे मिस्र के राष्ट्रपति को भी काफ़ी राहत मिली होगी।

क्योंकि ट्रम्प व्हाइट हाउस में अपने आख़िरी दिन गिन रहे हैं, इसलिए सीसी को एक नए समर्थक राष्ट्रपति की तुरंत ज़रूरत है। अमरीका के नए चुने गए राष्ट्रपति जो बाइडन पर मिस्र के ख़िलाफ़ मानवाधिकारों के उल्लंघन के लिए कार्यवाही का दबाव बढ़ता जा रहा है। सीसी का ध्यान इस बात पर ज़रूर गया होगा कि अमरीका के संभावित विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकेन ने हाल ही में मिस्र में तीन प्रमुख कार्यकर्ताओं की गिरफ़्तारी पर चिंता जताई थी। हालांकि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हंगामा मचने के बाद, उन्हें रिहा करना पड़ा, जिसने सीसी की कमज़ोरी को दर्शा दिया है।

दूसरी ओर सीसी ने मैक्रॉन के साथ समरसता दिखाई और फ़्रांस में पैग़म्बरे इस्लाम के अपमानजनक कार्टूनों के प्रकाशन या फ़्रांसीसी राष्ट्रपति द्वारा इस्लाम को संकट में बताने की निंदा नहीं की। क्योंकि एक दूसरे के दोषों से आंखें मूंदना, आख़िर दोस्ती का तक़ाज़ा है।