इस शहर में एक तिहाई आबादी मुसलमानों की है। हालांकि उनकी पहली पसंद बर्नी सैंडर्स थे लेकिन उनका अस्ल मक़सद ट्रम्प से छुटकारा पाना है।
सन 2020 का अमरीका का राष्ट्रपति चुनाव इस देश के अफ्रीकी मूल के नागरिकों के लिए बेहद अहम है।
डेरबर्न नगर में स्टारबक्स के एक काफी हाउस में बैठ कर हमने समाजी कार्यकर्ता नेदा अलहनूती से बात चीत की। उनके पास कोरोना और अपनी नौकरी की वजह से समय बहुत कम रहता है लेकिन उसके बावजूद वह ट्रम्प को हराने के अभियान में पूरी तरह से जुटी हुई हैं।
वह फिलिस्तीनी मूल की अमरीकी नागरिक हैं । डेरबर्न जहां स्थित है वह वही इलाक़ा है जहां से रशीदा तालिब ने कांग्रेस में सीट हासिल की है। इस इलाक़े में बर्नी सैंडर्स को भारी वोट मिले थे। नेदा हनूती मज़ाक में कहती हैं कि कितनी अजीब बात है कि यहां के इतने सारे मुस्लिम, एक यहूदी से इतना प्रेम करते हैं? फिलिस्तीनी भी उन्हें चाहते हैं क्योंकि वह पहली अमरीकी राजनेता हैं जो फिलिस्तीनियों के अधिकारों को औपचारिक रूप से स्वीकर करते हैं।
नेदा और अमरीका के अन्य मुसलमान, जो बायडन को जिताने की कोशिश में हैं। वह यह स्वीकार करती हैं कि उनका यह अभियान काफी कठिन है। वह कहती हैं कि मुझे मालूम है कि बाइडन फिलिस्तीनियों के बहुत बड़े समर्थक नहीं लेकिन हम यह नहीं भूल सकते कि ट्रम्प ने बैतुलमुक़द्दस को इस्राईल की राजधानी स्वीकार किया है।

जो बाइडन ने गत 20 जूलाई को अमरीकी मुसलमानों से वीडियो कांफ्रेंसिंस के दौरान कहा था जीतने की दशा में वह मुसलमानों की यात्रा पर लगे प्रतिबंध को खत्म कर देंगे जिसे सन 2017 में ट्रम्प ने लगाया था और जिसके तहत यमन, सीरिया, लीबिया, ईरान, सोमालिया और उत्तरी कोरिया के नागरिकों के अमरीका में प्रवेश पर प्रतिबंध लगा दिया गया है।
नेदा ने बताया कि बाइडन ने इस भेंट में मुसलमानों के पैगंबर को भी याद किया ।
मिशिगन के डेरबर्न नगर में कोरोना का तांडव नज़र आया जिसकी वजह से बायटन के लिए प्रचार में नेदा को बहुत सी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है लेकिन उन्होंने अपने दोस्तों के साथ मिल कर अब तक इस नगर के नागरिकों के घर 13 लाख पत्र पहुंचाए हैं जबकि 2 लाख 40 हज़ार फोन किये हैं। उनका कहना है कि यह सब मतदान के समय वोट के रूप में नज़र आने वाला है।
सन 2016 में इस इलाक़े में रिपब्लिकन प्रत्याशी को डेमोक्रेट प्रत्याशी के मुकाबले में मात्र 11 हज़ार वोटों से जीत मिली थी और नेदा हनूती का कहना है कि यहां मुस्लिम वोट निर्णायक भूमिका निभाते हैं।

मुस्लिम धर्मगुरु हसन क़ज़वीनी ने फ्रासं-24 से बात करते हुए कहा कि हिलैरी क्लिंटन को अमरीकियों में लोकप्रियता नहीं हासिल थी और मुसलमानों में तो वह बिल्कुल ही लोकप्रिय नहीं थीं वह बहुत महत्वकांक्षी थीं जिसकी वजह से उनकी छवि खराब हुई लेकिन बाइडन की बात अलग है। आज सारे मुसलमान उनका समर्थन करते हैं और उन्हें पता है कि बाइडन को वोट न देने का क्या परिणाम निकल सकता है।
हसन क़ज़वीनी कहते हैं कि अब मुसलमान ट्रम्प को 4 साल और बर्दाश्त नहीं कर सकते क्योंकि वह नस्लभेदी हैं और उन्होंने मुसलमानों को हाशिये पर डाल दिया है।
शिया धर्मगुरु ईरान के प्रति ट्रम्प की नीतियों पर अपना गुस्सा नहीं छिपाते और वह अमरीकी प्रतिबंधों की वजह से ईरानी जनता की समस्याओं का उल्लेख करते हैं। उन्होंने कहा कि ट्रम्प, मानवाधिकारों का सम्मान नहीं करते और सदी अरब, मिस्र और अन्य देशों में तानाशाहों का समर्थन करते थे।
अंत में वह कहते हैः ट्रम्प की छत्रछाया में मुझे अमरीकी होने में कोई गर्व नहीं।