ट्रम्प ने उत्तरी कैरोलिना में अपने समर्थकों से कहा कि उन्हें चाहिए मेल इन बैलट (ईमेल द्वारा मतदान) में भाग लें और इसी तरह मतदान के दिन बैलट बॉक्स में भी अपना वोट डालें। हालांकि अमरीकी क़ानून में डबल वोटिंग करना एक अपराध है, जिसका आहवान ट्रम्प कर रहे हैं।
ट्रम्प से जब उनकी इस अपील के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहाः लोगों को वोट डालने के लिए जाना चाहिए, अगर निगरानी व्यवस्था अच्छी है, जैसा कि दावा किया जाता है, तो निश्चित रूप से वे बैलट बॉक्स में वोट डालने में सफल नहीं हो पायेंगे।
इसका मतलब यह है कि अमरीकी राष्ट्रपति लोगों को अपराध करने के लिए उकसा रहे हैं और उन्हें कहीं न कहीं यह भी विश्वास है कि सिस्टम उन्हें पकड़ नहीं पाएगा, और संभवत अगर पकड़े भी गए तो क्या हो जाएगा?
इसके बाद अगर ट्रम्प अपने समर्थकों से बैंक लूटने के लिए कहें, तो हैरान नहीं होना चाहिए। क्योंकि अगर बैंक की सुरक्षा व्यवस्था चाक चौबंद होगी, जैसा कि कहा जाता है तो वे बैंक लूटने में सफल नहीं हो सकेंगे।
ट्रम्प लम्बे समय से पोस्टल वोटिंग में धांधली की आशंका जता रहे हैं और उनका कहना है कि इस तरह से फ़ेक वोटिंग की संभावना अधिक है।
इससे अमरीका में राष्ट्रपति चुनाव को लेकर यब बात साबित हो जाती है कि समस्त दावों के विपरीत, अमरीकी चुनाव सुरक्षित नहीं हैं और उनमें धांधली की पूरी गुंजाइश है। हो सकता है, पिछले चुनाव में कि जिसमें ट्रम्प ने बहुत ही मामूली अंतर से जीत दर्ज की थी, उन्होंने ख़ुद यह फ़ार्मूला आज़माया हो और धांधली करके चुनाव जीत लिया हो। लेकिन इस बार उनकी लोकप्रियता में भारी गिरवाट की वजह से उनके लिए वोटिंग या काउटिंग में धांधली करना इतना आसान नहीं लग रहा हो।
ट्रम्प अपने बयानों में पोस्टल वोटिंग की कई ख़ामियों को उजागर कर चुके हैं, जिसमें से एक दो बार मतदान करना है, जिसके लिए अब वे ख़ुद लोगों से अपील कर रहे हैं। क्या पहले भी ऐसा होता रहा है, यह एक बड़ा सवाल है, जिसकी जांच के बाद, अमरीकी चुनावों में दूध का दूध और पानी का पानी सामने आ सकता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि दशकों से अमरीकी चुनावों में संगठित रूप से बड़े पैमाने पर धांधली होती चली आ रही है, उनमें से एक बड़ी संख्या में मरे हुए लोगों और अमरीका में ग़ैर मौजूद लोगों के वोट का इस्तेमाल है।
इसी तरह से वोटिंग मशीनों के ज़रिए वोट ट्रांस्फ़र के आरोप भी लगते रहे हैं। रिपब्लिकन नेताओं पर वोटिंग मशीन कंपनियों के मालिक होने और वोट ट्रांस्फ़र के आरोप लगे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि वोटिंग मशीन द्वारा होने वाली वोटिंग में यह साबित करने के लिए कोई उपाय नहीं है कि वोट जिस उम्मीदवार को डाला गया है, उसकी गिनती उसी के खाते में हुई है, या उसके प्रतिद्वंद्वी के।
2004 के राष्ट्रपति चुनाव में भी ऐसे आरोप लगे थे कि जॉर्ज बुश द्वारा अपने प्रतिद्वंद्वी जॉन केरी के वोट चुराए गए हैं।
लेकिन राष्ट्रपति चुनाव 2020 में धांधली की संभावना को लेकर सबसे बड़ी सच्चाई यह है कि वर्तमान राष्ट्रपति इस तरह के आरोप लगा रहा है।