पत्रिका ने इसी हफ़्ते अपने एक संपादकीय में दावा किया है कि यह कार्टून, "इतिहास से संबंधित हैं, और इतिहास को न तो दोबारा लिखा जा सकता है और न ही मिटाया जा सकता है।"
ग़ौरतलब है कि 2015 में पेरिस हमले में शामिल संदिग्ध हमलावरों के ख़िलाफ़ मुक़दमा शुरू होने की पूर्व संध्या पर इन अपमानजनक कार्टूनों को फिर से प्रकाशित किया गया था।
फ़्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रॉन ने शार्ली हेब्दो के इस क़दम की निंदा करने से इनकार कर दिया और इसे अभिव्यक्ति की आज़ादी बताते हुए दावा किया कि उन्हें इस बारे में निर्णय लेने का अधिकार नहीं हैं।
बुधवार को तुर्क विदेश मंत्रालय ने एक बयान जारी करके फ़्रांसीसी पत्रिका के इस क़दम की कड़ी आलोचना की और कहा कि इस मुद्दे पर मैक्रॉन सरकार का पक्ष अस्वीकार्य है।
तुर्क विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता हामी अक्सॉय का कहना था कि अभिव्यक्ति या मीडिया की आज़ादी के नाम पर मुसलमानों की धार्मिक भावनाओं से खिलवाड़ की इजाज़त नहीं दी जा सकती।
अक्सॉय का कहना था कि जो लोग डेमोक्रेट और लिबरल होने का दावा कर रहे हैं, इस्लामोफ़ोबिया और मुसलमानों के ख़िलाफ़ नफ़रत फैलाकर वे फ़्रांस और यूरोप में एक नई फासीवादी और नस्लवादी पीढ़ी की सेवा कर रहे हैं।
उन्होंने फ़्रांस और अन्य देशों के नेताओं से इस तरह के इस्लाम विरोधी क़दम के ख़िलाफ़ स्पष्ट रूप से अपना पक्ष लेने की अपील की।
पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने भी फ़्रांस की साप्ताहिक पत्रिका के क़दम की निंदा करते हुए कहा है कि मुसलमानों की धार्मिक भावनाओं पर जानबूझकर प्रहार किया जा रहा है।
पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय ने बयान जारी करके कहा है कि इस्लामाबाद फ़्रांसीसी पत्रिका शार्ली हेब्दो द्वारा फिर से पैग़म्बरे इस्लाम (स) के अपमानजनक कार्टून छापने की कड़े शब्दों में निंदा करता है।
बयान में कहा गया है कि इस तरह के अपराध को किसी भी तरह सही नहीं ठहराया जा सकता, जिससे एक अरब से भी ज़्यादा मुसलमानों की भावनाएं आहत होंगी।
गुरुवार को पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद क़ुरैशी ने एक वीडियो संदेश में इस अपमानजनक क़दम की निंदा करते हुए कहा कि इस्लामाबाद ने पेरिस को अपनी चिंताओं से अवगत करवा दिया है।
उन्होंने कहा कि हम इस्लामोफ़ोबिया और नस्लवाद में वृद्धि देख रहे हैं और इस तरह के अपराधों को विश्व शांति तथा धार्मिक सौहार्द के लिए बड़ा ख़तरा समझते हैं।