1 सितंबर 2020 - 12:23
इमारात का विश्वासघात ज़्यादा देर तक नहीं चलेगा और यह कलंक उसका कभी पीछा नहीं छोड़ेगाः वरिष्ठ नेता

इस्लामी क्रांति के वरिष्ठ नेता आयतुल्लाहिल उज़मा सैयद अली ख़ामेनेई ने कहा है कि संयुक्त अरब इमारात ने इस्लामी जगत से भी विश्वासघात किया और अरब राष्ट्रों और क्षेत्रीय देशों से भी विश्वासघात किया और फ़िलिस्तीन से भी ग़द्दारी की।

इस्लामी क्रांति के वरिष्ठ नेता ने मंगलवार की सुबह शिक्षण संस्थाओं से जुड़े अधिकारियों को वीडियो कांफ़्रेंसिंग द्वारा संबोधित करते हुए ज़ायोनी शासन के साथ संबंध स्थापना के लिए संयुक्त अरब इमारात की हालिया कार्यवाही के बारे में कहा कि इमारात ने इस्लामी जगत से भी विश्वासघात किया और अरब राष्ट्रों और क्षेत्रीय देशों से भी विश्वासघात किया और फ़िलिस्तीन से भी ग़द्दारी की, अलबत्ता यह ग़द्दारी ज़्यादा समय तक नहीं चल सकेगी और यह कलंक उन लोगों के माथे पर हमेशा रहेगा जिन्होंने फ़िलिस्तीनी देश पर क़ब्ज़े और फ़िलिस्तीनी राष्ट्र को बेघर किए जाने को भुलाने की कोशिश की और क्षेत्र में ज़ायोनियों के लिए रास्ता खोल दिया। आयतुल्लाहिल उज़मा ख़ामेनेई ने इस्लामी जगत व क्षेत्र के हितों के ख़िलाफ़ ज़ायोनी शासन और अमरीकी प्रशासन में मौजूद दुष्ट ज़ायोनी तत्वों की निर्मम कार्यवाहियों में संयुक्त अरब इमारात की सरकार के सहयोग पर अफ़सोस प्रकट करते हुए कहा कि हमें उम्मीद है कि इमारात वाले जल्द ही जाग जाएंगे और अपने इस काम की भरपाई करेंगे।

 

उन्होंने अपने बयान के एक अन्य भाग में अन्य देशों के शिक्षा तंत्र में पश्चिम वालों की ओर से प्रभाव डालने की कोशिशों की तरफ़ इशारा करते हुए कहा कि आज पश्चिम का सामाजिक दर्शन, ख़ुद पश्चिम में विफल हो चुका है और उसके अनैतिक प्रतीक हालीवुड से लेकर पेंटागन तक में स्पष्ट रूप से देखे जा सकते हैं। इस्लामी क्रांति के वरिष्ठ नेता ने दुश्मन की घुसपैठ की ओर से सतर्क रहने की ज़रूरत पर बल देते हुए कहा कि दुश्मन चाहता है कि जो काम वह सैन्य मार्ग से करने में अक्षम है, उसे समाज व शिक्षा तंत्र में घुसपैठ के माध्यम से अंजाम दे और इस प्रकार के लोगों का प्रशिक्षण करे जो उसकी तरह सोचें और उसके लक्ष्यों को व्यवहारिक बनाएं ताकि राष्ट्रों की लूटमार का मार्ग प्रशस्त हो जाए।

 

आयतुल्लाहिल उज़मा सैयद अली ख़ामेनेई ने इस साल मुहर्रम के पहले दस दिनों में ईरानी राष्ट्र की शोक सभाओं और मजलिसों व अज़ादारी को देश के इतिहास में एक नया अध्याय बताया और कहा कि कोरोना के कारण अत्यधिक बंदिशों के बावजूद लोगों, वक्ताओं और नौहाख़ानों ने हुसैनी जज़्बात के साथ और महान व आध्यात्मिक सभाएं आयोजित करके मेडिकल गाइड लाइनों का पालन किया और पैग़म्बरे इस्लाम के परिजनों से श्रद्धा रखने वाले एक व्यक्ति के रूप में दिल की गहराई से उन सबका आभार प्रकट करता हूं।