तेहरान: ईरान के सशस्त्र बलों के सर्वोच्च कमांडर ने सेना के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक में कहा कि दुश्मन की किसी भी धमकी का तुरंत, प्रभावी और भौगोलिक सीमाओं से परे जवाब दिया जाना चाहिए।
ईरान के सशस्त्र बलों के वरिष्ठ कमांडरों ने आयतुल्लाह सय्यद मुज्तबा खामेनेई से मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने दुश्मनों का मजबूती से सामना करने के लिए स्मार्ट और पूरी सैन्य तैयारी को देश की अधिकतम सुरक्षा और प्रतिरोध क्षमता के लिए जरूरी बताया।
उन्होंने कहा कि दुश्मन की धमकी चाहे किसी भी स्तर या प्रकार की हो, उसका जवाब तुरंत और प्रभावशाली तरीके से दिया जाना चाहिए और इसके लिए भौगोलिक सीमाओं को बाधा नहीं माना जाना चाहिए।
ईरान के सर्वोच्च कमांडर ने यह भी कहा कि अगर दुश्मन दोबारा ईरान के खिलाफ सैन्य या आतंकवादी हमले शुरू करते हैं, तो संघर्ष कब और किन परिस्थितियों में समाप्त होगा, इसका फैसला ईरान की सशस्त्र सेनाएं और ईरानी जनता करेगी।
बैठक में सैन्य खुफिया व्यवस्था को मजबूत करने, देश की रक्षा नीति और रणनीति को और विकसित करने, नई तकनीकों के माध्यम से रक्षा और सुरक्षा क्षमताओं को बढ़ाने तथा सैनिकों के मनोबल और जिहादी भावना को मजबूत करने पर भी जोर दिया गया।
इसके साथ ही सशस्त्र बलों के जवानों की आर्थिक और जीवन संबंधी जरूरतों को पूरा करने तथा उन्हें बेहतर सहयोग देने की आवश्यकता पर भी बल दिया गया।
सर्वोच्च कमांडर के निर्देशों में यह भी कहा गया कि टारगेट बैंक को इस तरह अपडेट किया जाए कि अमेरिका और इज़राइल से जुड़े विभिन्न महत्वपूर्ण भौतिक और गैर-भौतिक संसाधन ईरानी सशस्त्र बलों की पहुंच में हों।
उन्होंने कहा कि ईरान की सशस्त्र सेनाओं को मिलने वाला राष्ट्रीय समर्थन देश की प्रतिरोधक क्षमता का एक महत्वपूर्ण आधार है। उनके अनुसार, विदेशी विरोधियों और उनके अंदरूनी समर्थकों के मुकाबले में जनता की मौजूदगी और समर्थन देश की सुरक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता रहेगा।
उन्होंने विभिन्न देशों में प्रतिरोध मोर्चे की दृढ़ता की सराहना करते हुए कहा कि पश्चिम एशिया में नए राजनीतिक और सुरक्षा व्यवस्था के निर्माण में विभिन्न क्षेत्रों के बीच एकता एक महत्वपूर्ण और रणनीतिक तत्व है।
उन्होंने उम्मीद जताई कि यह नई व्यवस्था आगे चलकर इस्लामी देशों और राष्ट्रों के बीच एकता को और मजबूत करेगी और एक नई इस्लामी सभ्यता के निर्माण के लिए जमीन तैयार करेगी।
आपकी टिप्पणी