इस समय स्थिति यह है कि भारत और पाकिस्तान दोनों कश्मीर को खो चुके हैं।
एक ज़माना था जब दिलों पर पाकिस्तान का राज हुआ करता था और ज़मीन पर भारत की हुक्मरानी थी लेकिन 5 अगस्त 2019 के बाद यह हालत है कि कश्मीरी पाकिस्तान से क्षुब्ध और नई दिल्ली से परेशान हैं।
आज दिल न इस्लामाबाद के लिए धड़कता है और न दिमाग़ पर दिल्ली की हुक्मरानी है। एक ने सब कूछ लूट लिया तो दूसरे ने बेसहारा छोड़ दिया। यूं कश्मीरी न अब वकालत की प्रतीक्षा में है और न ही ज़ुल्म से डरता है। एक ज़िंदा चलती फिरती लाश है जो अपनी आख़री मंज़िल की तलाश में है।
5 अगस्त 2019 की कार्यवाही का ड्राप सीन क्या होगा यह तो आने वाला वक्त ही बताएगा लेकिन लक्षण बता रहे हैं कि वक्त के गर्भ में कुछ अच्छा नहीं पल रहा है और जब वह सामने आएगा तो भारत अपने आपको आंतरिक और बाहरी सतह पर एक एसे भंवर में पाएगा जिससे निकल पान अगर असंभव नहीं तो बेहद कठिन तो ज़रूर होगा।
रियाज़ मलिक
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