27 जुलाई 2020 - 13:58
ईरान-चीन रणनीतिक साझेदारी, इस्राईल के लिए सबसे बड़ी चुनौती होगी, पूर्व मोसाद प्रमुख

इस्राईल की जासूसी एजेंसी मोसाद के पूर्व प्रमुख का कहना है कि ईरान-चीन रणनीतिक साझेदारी से ईरान की अर्थव्यस्था मज़बूत होगी, जिससे इस्राईल का वजूद ख़तरे में पड़ जाएगा।

मोसाद के पूर्व प्रमुख डेनी यातूम ने सोमवार को ईरान और चीन के बीच 25 वर्षीय रणनीतिक साझेदारी के इस्राईल पर पड़ने वाले नकारात्मक प्रभावों के प्रति चेतावनी जारी की है।

यातूम का कहना था कि चीन पश्चिम एशिया में अपना प्रभाव बढ़ाना चाहता है, इसीलिए वह ईरान के साथ सहयोग बढ़ा रहा है।

उन्होंने दावा किया कि उनका असली उद्देश्य, भूमध्यसागर और यूरोप के निकट पहुंचना है।

यातूम ने चेतावनी दी कि तेहरान और बीजिंग के बीच रणनीतिक साझेदारी, इस्राईल के लिए सिर दर्द बन जाएगी, इसलिए कि इससे ईरान की अर्थव्यस्था पटरी पर लौट आएगी और यह इस्राईल की सुरक्षा के लिए गंभीर ख़तरा है।

मोसाद के पूर्व चीफ़ का कहना था कि जब चीन, ईरान में भारी निवेश करेगा, तो परिणाम स्वरूप उसकी अर्थव्यस्था मज़बूत होगी, जिसके बाद तेहरान एक बार फिर हिज़्बुल्लाह, हमास और जिहादे इस्लामी जैसे प्रतिरोधी संगठनों की बड़े पैमाने पर वित्तीय सहायता कर सकेगा।

उन्होंने कहाः ईरान हमारा असली दुश्मन है, हम उसके और उसके सहयोगियों के हर क़दम पर नज़र रखे हुए हैं। हम तेहरान को अपनी सीमाओं से दूर रखने का प्रयास कर रहे हैं और क्षेत्र में उसके बढ़ते प्रभाव का मुक़ाबला कर रहे हैं।

यातूम ने ज़ायोनी शासन से कहा कि वह चीन पर दबाव डाले और इस बात का आश्वासन प्राप्त करे कि तेहरान-बीजिंग साझेदारी से तेल-अवीव को ख़तरा नहीं होगा।

उनका यह भी कहना था कि मैं समझता हूं तेहरान और बीजिंग के बीच यह समझौता अंतिम रूप ले चुका है और उसमें परिवर्तन संभव नहीं है। लेकिन इस्राईल के चीन के साथ अच्छे संबंध हैं, इसलिए चीनी अधिकारियों से यह मांग की जा सकती है कि वे हमारे हितों का भी ख़याल रखें। लेकिन यहां सवाल यह है कि चीन जो सिर्फ़ अपने हितों को साधना चाहता है, हमारी इस मांग पर ध्यान भी देगा या नहीं।

इससे पहले भी कई ज़ायोनी रणनीतिकार ईरान-चीन रणनीतिक साझेदारी के बारे में अपनी चिंताएं ज़ाहिर कर चुके हैं और कई ने तो इसे रोकने के लिए भी सुझाव दिए हैं।