जिस तरह दिन दहाड़े बाबरी मस्जिद को आराम से गिराया गया और पूरा प्रशासन तमाशा देखता रहा उससे कहीं न कहीं मुसलमानों में यह एहसास ज़रूर पैदा हुआ कि शासन व्यवस्था उनकी रक्षा को अपनी ज़िम्मेदारी नहीं समझती या उन्हें सबक़ सिखाना चाहती है।
वह समय गुज़र गया और लोग अपनी अपनी दिनचर्या में व्यस्त हो गए। छिटपुट घटनाएं होती रहीं और समय समय पर ज़ख़्म हरे होते रहे मगर फिर 2002 के गुजरात दंगे हो गए। इन दंगों का भी राम जन्म भूमि और बाबरी मस्जिद से एक कनेक्शन ज़रूर है। उनकी शुरुआत उन कारसेवकों से हुई थी जो अयोध्या से गुजरात लौटे थे।
गुजरात दंगों ने मुसलमानों को फिर एहसास दिलाया कि व्यवस्था उनकी रक्षा नहीं कर सकती अगर कोई बचा है तो अपनी क़िस्मत से बच गया है। व्यवस्था जब एहसान जाफ़री जैसे नेता को नहीं बचा सकी जो कभी व्यवस्था का हिस्सा रह चुके थे तो आम मुसलमानों को क्या बचाती?
बाबरी मस्जिद का मामला अदालतों में घिसटता रहा और घिसटते घिसटते आख़िरकार 2019 में इसका फ़ैसला आ गया। मुसलमानों की पहले से टूट चुकी उम्मीद के दो चार जर्जर स्तंभ अगर कहीं खड़े रह गए थे तो वह भी ध्वस्त हो गए।
इन सिलसिलेवार घटनाओं ने जिनकी सूची बहुत लंबी है मुसलमानों में निराशा और हताशा पैदा की। यह सब कुछ हुआ और योजनाबद्ध तरीक़े से हुआ, बहुसंख्यकों को संतुष्ट करने के लिए हुआ मगर फिर अचानक एक नया मोड़ सामने आ गया। वैसे नया मोड़ नहीं इससे पहले भी यह विचार व्यक्त किए जाते रहे हैं। अब नेपाल के प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री जैसे उच्च पदस्थ अधिकारियों ने जो हिंदू धर्म के मानने वाले हैं अपने बयानों से पूरे हिंदू समाज को यह एहसास दिलाया कि केवल मिथ, भ्रम और सुनी सुनाई बातों के आधार पर सारा बखेड़ा खड़ा किया गया। यहीं यह भी संकेत मिला कि भारत के सुप्रीम कोर्ट ने केवल सुनी सुनाई बातों और मिथ को आधार बनाकर अपना फ़ैसला सुना दिया।
नेपाल के प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली ने सोमवार को कहा कि 'वास्तविक' अयोध्या नेपाल में है, भारत में नहीं। उन्होंने कहा कि भगवान राम का जन्म दक्षिणी नेपाल के थोरी में हुआ था। काठमांडू में प्रधानमंत्री आवास में नेपाली कवि भानुभक्त की जयंती के अवसर पर ओली ने कहा कि नेपाल ''सांस्कृतिक अतिक्रमण का शिकार हुआ है और इसके इतिहास से छेड़छाड़ की गई है।''
ओली ने कहा, ''हालांकि वास्तविक अयोध्या बीरगंज के पश्चिम में थोरी में स्थित है, भारत अपने यहां भगवान राम का जन्मस्थल होने का दावा करता है।'' ओली ने कहा कि इतनी दूरी पर रहने वाले दूल्हे और दुल्हन का विवाह उस समय संभव नहीं था जब परिवहन के साधन नहीं थे। उन्होंने कहा, ''बीरगंज के पास जिस स्थान का नाम थोरी है वह वास्तविक अयोध्या है जहां भगवान राम का जन्म हुआ था। भारत में अयोध्या पर बड़ा विवाद है। लेकिन हमारी अयोध्या पर कोई विवाद नहीं है।''
इसके बाद नेपाल के विदेश मंत्री प्रदीप ज्ञवाली ने कहा कि रामायण पर रिसर्च के बाद इतिहास बदल जाएगा। उन्होंने कहा कि अभी तक हम सिर्फ विश्वास के आधार पर ही सभी बातों को मानते हैं।
ज्ञवाली ने कहा, ''हमें यही बताया गया है कि सीता का जन्म जनकपुर में हुआ और राम का जन्म अयोध्या में हुआ, लेकिन जिस दिन अध्ययन से नए तथ्य मिल जाएंगे, रामायण का इतिहास बदल जाएगा।'' ज्ञवाली ने एक इंटरव्यू में कहा कि जिस तरह बुद्ध को लेकर लिखित इतिहास है, वैसा रामायण के साथ नहीं है।
ज्ञवली ने कहा, ''रामायण सभ्यता की पुरातात्विक अध्ययन की पुष्टि के लिए अभी पर्याप्त प्रमाण नहीं हैं।'' उन्होंने ने कहा कि रामायण में वर्णित स्थानों को लेकर दोनों देशों के बीच चर्चा चल रही है। इसके सांस्कृतिक भूगोल को अंतिम रूप दिया जाना बाकी है।
अहमद अब्बास
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