इस्राईली अख़बार हारेट्ज़ की रिपोर्ट के अनुसार, अमरीकी और इस्राईली अधिकारियों ने न्यूयॉर्क टाइम्स को बताया कि पारचीन स्थित सैन्य अड्डे के निकट हुए विस्फ़ोट से इस्राईल और अमरीका का कोई लेना-देना नहीं है।
ग़ौरतलब है कि ईरान का कहना है कि शुक्रवार को पारचीन में यह धमाका गैस स्टेशन में विस्फ़ोट के कारण हुआ था। तेहरान ने मीडिया में घटना स्थल की तस्वीरें भी जारी की थीं।
इसके बावजूद, कुछ मीडिया रिपोर्टों में दावा किया गया था कि इस्राईली युद्धक विमानों के मिसाइल हमलों के कारण, पारचीन में धमाके हुए हैं।
न्यूयॉर्क टाइम्स का कहना है कि इस्राईली अधिकारियों ने इस तरह की रिपोर्टों को निराधार बताते हुए सख़्ती से ख़ारिज कर दिया है।
इस बीच, ईरानी सूत्रों ने नतंज़ परमाणु प्रतिष्ठान की एक निर्माणाधीन इमारत में गुरुवार को हुई घटना को देश की परमाणु क्षमताओं को प्रभावित करने की कोशिशों से जोड़ने के प्रति कड़ी चेतावनी दी है।
प्रेस टीवी की रिपोर्ट के मुताबिक़, ईरान की सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद की एक क़रीबी वेबसाइट ने चेतावनी जारी की है कि देश की परमाणु क्षमताओं को कम करने के प्रयास के श्रेय के व्यापक अंतर्राष्ट्रीय परिणाम निकल सकते हैं, जिसमें ज़ायोनी शासन के परमाणु प्रतिष्ठानों पर हमले की संभावना भी शामिल है।
शनिवार को नूर न्यूज़ वेबसाइट ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि ईरान के नतंज़ परमाणु प्रतिष्ठान पर तथाकथित साइबर हमले का श्रेय इस्राईल को दिए जाने का मतलब यह है कि इस्राईल ख़ुद भी इसी तरह के हमलों की ज़द पर है।
ईरानी अधिकारियों ने नतंज़ परमाणु संयंत्र के एक खुले भाग में गुरुवार को हुई घटना के कारणों को निर्धारित कर लिया है। हालांकि उनका कहना है कि उचित समय पर इस घटना के कारण और अधिक जानकारी को सार्वजनिक किया जाएगा।
सुरक्षा सूत्रों का कहना है कि अगर ईरान के परमाणु प्रतिष्ठानों को निशाना बनाने के पीछे अमरीका या इस्राईल की भूमिका का पता चलता है कि तो तेहरान जवाबी कार्यवाही ज़रूर करेगा।
नूर न्यूज़ की रिपोर्ट में कहा गया है कि अगर इस्राईल ने ईरान की रेड लाइन को पार करने की कोशिश की तो उसे इसके परिणाम भुगतने के लिए तैयार रहना चाहिए।