रूसी न्यूज़ एजेन्सी स्पूतनिक के अनुसार इस दवा की पहली खेप, रूस ने बेलारूस के लिए भेज दी है और जल्द ही काज़ेकिस्तान को भी भेजी जाएगी जबकि लेटिन अमरीका के कई देशों के साथ इस दवा के निर्यात के लिए वार्ता जारी है।
इसी तरह राष्ट्रमंडल और मध्य पूर्व के भी कई देशों ने रूस की इस दवा में दिलचस्पी दिखायी है।
एवीफेवीर नाम की इस दवा को रूसी स्वास्थ्य मंत्रालय ने रजिस्टर्ड करके लाइसेंस जारी कर दिया है और यह दुनिया में कोविड-19 की पहली दवा कही जा रही है।
दवा बनाने वाले रूसी अधिकारियों ने बताया है कि अमरीका द्वारा कोरोना के उपचार में प्रभावशाली दवा रेमडेसिवीर की पूरी खरीदारी के बाद दुनिया में कोरोना की दवा का अभाव पैदा हो सकता था इस लिए रूस ने कोराना की नयी और पहली दवा एवीफेवीर का निर्यात शुरु कर दिया।
याद रहे अमरीका ने कोरोना के लिए प्रभावशाली दवा रेमडेसिवीर दवा का सारा स्टॉक खुद ही खरीद लिया है। जिससे अब दूसरे देशों को कई महीने दवा नहीं मिल पाएगी।
रेमडेसिवीर नाम की दवा अमेरिका की ही कंपनी गिलीड साइंसेज बनाती है। ये दवा कोरोना मरीज पर 100 प्रतिशत रिजल्ट तो नहीं देती, लेकिन इलाज में काफी प्रभावशाली साबित होती है।
मई में ट्रंप सरकार ने रेमडेसिवीर के प्रयोग को स्वीकृति दी थी। फिर अमेरिका के स्वास्थ्य और मानव सेवा विभाग ने ऐलान किया है कि सरकार ने रेमडेसिवीर की बड़ी खेप खरीद लिया है।
रूसी न्यूज़ एजेन्सी के अनुसार रूस द्वारा बनायी गयी कोरोना की दवा, इस प्रकार की सभी दवाओं से अधिक सस्ती है और इससे कोरोना के आरंभ में ही उसका इलाज हो जाता है।
अमरीका द्वारा रेमडेसिवीर पर एकाधिकार के बाद रूसी कंपनी ने अपनी क्षमता तीन गुना बढ़ा दी है जिसकी वजह से दवा का उत्पादन रूस की ज़रूरत से अधिक हो गया है जिसके बाद रूसी कंपनी ने इस दवा का निर्यात आरंभ कर दिया है।