पिछले हफ़्ते लद्दाख़ के गलवान घाटी इलाक़े में दोनों देशों के सैनिकों के बीच हुई झड़प में भारत के 20 सैनिकों की मौत हो गई थी, जिसके बाद दोनों ही देशों ने एक दूसरे पर तनाव बढ़ाने के आरोप लगाए थे।
भारती विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अनुराग श्रीवास्तव ने गुरुवार को नई दिल्ली में प्रेस ब्रीफिंग के दौरान कहाः मई की शुरुआत से ही चीन एलएसी पर अपने सैनिकों और हथियारों में वृद्धि कर रहा है।
श्रीवास्तव का कहना थाः यह हमारे बीच हुए विभिन्न समझौतों का उल्लंघन है। भारत ने भी जवाब में अपने सैनिकों की तैनाती की है।
यह पहली बार है कि नई दिल्ली ने लद्दाख़ में सीमा पर भारी संख्या में सैनिकों की तैनाती की बात स्वीकार की है।
दूसरी ओर चीन, ताज़ा झड़पों और वर्तमान तनावपूर्ण स्थिति के लिए भारत को ज़िम्मेदार ठहरा रहा है और उसका कहन है कि भारतीय सैनिकों ने उसके सैनिकों पर हमला किया था।
15 जून की भीषण झड़प के बाद, दोनों ही देशों ने तनाव कम करने के लिए ज़रूरी क़दम उठाए जाने पर बल दिया था, लेकिन ज़मीन पर हालात इसके बिल्कुल विपरीत हैं।
चीन ने सीमा पर कई मोर्चे खोल दिए हैं और वह सीमावर्ती क्षेत्रों में रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण समझे जाने वाले निर्माण कार्य अंजाम दे रहा है।
उधर चीनी सैनिकों के साथ मारे गए सैनिकों के ख़ून का बदला लेने के लिए देश की जनता की ओर से मोदी सरकार पर भारी दबाव है।
हालांकि भारत सरकार चीन से सीधे टकराव से बचती रही है, लेकिन सीमा पर अगर लम्बे समय तक तनावपूर्ण स्थिति रहती है तो टकराव बढ़ भी सकता है।