20 जून 2020 - 17:32
अमरीका के कमर तोड़ आर्थिक प्रतिबंधों से प्रतिरोध मोर्चा कैसे मुक़ाबला करेगा?

क्षेत्र के मामलों पर नज़र रखने वाले और राजनैतिक टीकाकारों का कहना है कि क़ैसर नामक क़ानून द्वारा सीरिया पर अमरीकी प्रतिबंधों से प्रतिरोध के मोर्चे को निशाना बनाया गया है और इसके बहुत से राजनैतिक आयाम हैं।

क्षेत्रीय विशेषज्ञों का मानना है कि साम्राज्यवादी ईरान पर प्रतिबंध लगाकर, परमाणु, हथियार और मीज़ाइल कार्यक्रमों के बारे में वार्ता करने पर मजबूर करने तथा तेहरान की क्षेत्रीय भूमिका को समाप्त करने के प्रयास में हैं।

क़ैसर क़ानून से साम्राज्यवाद चाहता है कि दमिश्क़ के घटक देश सीरिया से निकल जाएं और दमिश्क़ द्वारा प्रतिरोध के मोर्चे का समर्थन ख़त्म हो जाए।

टीकाकार बल देते हैं कि विश्व साम्राज्यवादियों लेबनान में प्रतिरोध के विरुद्ध भी प्रतिबंध लगाए हैं ताकि वह युद्ध और धमकी द्वारा प्रतिरोध के मार्ग को नहीं रोक सकता तो उसने प्रतिबंधों का सहारा लिया है।

सीरिया के कुछ सांसदों का कहना है कि सीरिया का घेराव और इस देश का परिवेष्टन कोई नई बात नहीं है बल्कि यह तो वर्षों पहले से मौजूद है और अमरीका, सीरिया के विषय से ख़ुद को अलग करना चाहता है किन्तु ज़ायोनी लॉबी ने अमरीकी सरकार पर भीषण दबाव डाल रखा है और वह अमरीका से चाहती है कि जब तक सीरिया से उसके सारे घटक निकल न जाएं तब तक दमिश्क़ पर दबाव डाले रहे।

सीरिया के सांसद हालिया तबदीलियों की समीक्षा करते हुए कहते हैं कि बश्शार असद, क्षेत्र में तनाव की जड़ को समाप्त करने के बाद जिसके मुख्य कर्ता धर्ता अमरीकी-ज़ायोनी एजेन्ट हैं, महत्वपूर्ण उपलब्धि के रूप में मैदाने जंग पर ध्यान दे रहे हैं।

सीरिया के सांसदों का कहना है कि विश्व साम्राज्यवाद, सीरिया में प्रतिरोध और ईरान की उपस्थिति को ख़त्म करना चाहता है और घेराव करके सीरिया की सरकार को गिराना नहीं चाहता क्योंकि उसे अच्छी तरह पता है कि सीरिया सरकार और प्रतिरोध का मोर्चा बाक़ी रहेगा, साम्राज्यवादी 2011 से पहले की स्थिति को लौटाना चाहते हैं ताकि प्रतिरोध से जुड़े सारे देश अपने अपने देशों को लौट जाएं।