कुछ शब्दों के इस ट्वीट से अनुमान लगाया जा सकता है कि फ़ार्स खाड़ी के अरब देशों की आगे की रणनीति क्या है और वह किस दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।
ज़ाही ख़लफ़ान ने संक्षिप्त मगर सबको क्षुब्ध कर देने वाले ट्वीट में लिखा कि दुशमन इस्राईल के बजाए दोस्त इस्राईल कहिए! प्राब्लम क्या है?
अपने विवादित ट्वीट के लिए बदनाम ज़ाही ख़लफ़ान इसी पर नहीं रुके उन्होंने बात आगे बढ़ाते हुए बताया कि इस्राईल के साथ सऊदी अरब और इमारात की दोस्ती के भविष्य की क्या तसवीर हो सकती है। ज़ाही ख़लफ़ान ने लिखा कि इस्राईल से दोस्ती कर लीजिए तेल की क़ीमत बढ़ जाएगी।
ज़ाही ख़लफ़ान ने लिखा कि जो भी फ़िलिस्तीनियों के लिए अलग देश की मांग करे वह फ़िलिस्तीनियों के लिए नरक तैयार कर रहा है।
ज़ाही ख़लफ़ान के यह ट्वीट बड़े संवेदनशील समय में आ रहे हैं क्योंकि इस समय इस्राईल वेस्ट बैंक के पूरे इलाक़े को हड़पने की कोशिश में लगा है।
ज़ाही ख़लफ़ान इस तरह के विश्वासघाती और घटिया बयान एसे समय में दे रहे हैं कि जब पश्चिमी एशिया के इलाक़े में इस्लामी प्रतिरोधक मोर्चा ईरान के नेतृत्व में लगातार विजय हासिल कर रहा है और इस मोर्चे ने फ़िलिस्तीन की आज़ादी का ठोस रोडमैप तैयार करके प्रभावी रूप से उस पर काम शुरू कर दिया है। इस मोर्चे का नारा है कि हम बैतुल मुक़द्दस में नमाज़ पढ़ेंगे। इस नारे से पूरे इस्राईल में गहरी चिंता पायी जाती है।
ख़ालिद अलजयूसी
फ़िलिस्तीनी पत्रकार