सूरए यूनुस की आयत क्रमांक नवीं और दसवीं का अनुवादः
निश्चित रूप से जिन लोगों ने ईमान लाने के पश्चात अच्छे कर्म किए उनका पालनहार उनके ईमान के माध्यम से उनका मार्गदर्शन करेगा। वे अनुकंपाओं से भरे ऐसे बाग़ों में होंगे जहां उनके पैरों के नीचे से नहरें बह रही होंगी। स्वर्ग में उनका कथन यही होगा कि प्रभुवर तू पवित्र है और वहां उनका अभिवादन सलाम होगा और उनका अंतिम कथन ये होगा कि सारी प्रशंसाएं उस अल्लाह के लिए हैं जो पूरे ब्रह्मांड का पालनहार है।
संक्षिप्त टिप्पणी:
ईश्वरीय मार्गदर्शन को लोक परलोक में स्वर्ग में रहने वाले मोमिनों की सबसे बड़ी पूंजी बताती है अलबत्ता ये मार्गदर्शन ईमान और भले कर्मों के कारण प्राप्त होता है।
इन आयतों से मिलने वाले पाठ:
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ईमान वाले को सदैव ही ईश्वरीय मार्गदर्शन की आवश्यकता होती है।
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सलाम, स्वर्ग वालों का कथन है और स्वर्ग के पूरे वातावरण में इसी की गूंज होती है, ईश्वर की ओर से सलाम, फ़रिश्तों की ओर सलाम और एक दूसरे के लिए स्वर्ग वालों का सलाम।