17 मई 2020 - 18:49
दाइशी- तकफ़ीरी टोले का बोरिया बिस्तर बांधने वाला अबू महदी अलमुहन्दिस, एमबीसी चैनल के नज़दीक आतंकवादी क्यों है?

यह कोई नई बात नहीं है कि सऊदी अरब के एमबीसी चैनल ने समस्त मानवीय और धार्मिक सिद्धांतों को रौंदते हुए इराक़ी स्वयं सेवी बल हश्दुश्शाबी के उप कमान्डर अबू महदी अलमुहन्दिस को आतंकवादी कहा हो क्योंकि सऊदी अरब पर सत्तासीन वहाबी क़बीला, हर उस व्यक्ति को जो उसके तकफ़ीरी, वर्चस्ववादी और अतिग्रहणकारी योजनाओं के विरुद्ध लड़े उसे आतंकवादी घोषित कर देता है।

यह बात किसी से छिपी नहीं है कि इराक़ी स्वयं सेवी बल के उप कमान्डर अबू महदी अलमुहन्दिस अमरीका, इस्राईल और दाइश की नज़र में एक आतंकवादी थे और इस तरह से स्वभाविक सी बात है कि सऊदी अरब भी मुसलमानों के इन दुश्मनो से अलग नहीं है और इस महान संघर्षकर्ता को आतंकवादी कहे।

बेगुनाह इराक़ी महिलाओं, बच्चों और पुरुषों का ख़ून अनायास सऊदी-तकफ़ीरी टोले ने बताया। सरकारी आंकड़ों के अनुसार 5 हज़ार सऊदी तकफ़ीरी आतंकवादियों ने 2007 तक इराक़ में अनेक आतंकवादी और आत्मघाती कार्यवाहियां की। इन पांच हज़ार आतंकवादियों में दाइश के आतंकवादियों को यदि जोड़ दिया जाए जिन्होंने वर्ष 2014 में इराक़ पर हमला किया और इराक़ के एक चौथाई भाग पर क़ब्ज़ा कर लिया, आम नागरिकों का जनसंहार किया, बच्चों को माओं के सामने क़त्ल कर दिया और महिलाओ को बंदी बना लिया।

शहीद अबू महदी अलमुहन्दिस ने तकफ़ीरी और वहाबी आतंकवादियों के विरुद्ध युद्ध किया और उन्हें पराजित कर दिया।

मूसिल, सलाहुद्दीन, अंबार, जरफ़ सख़रा जैसे क्षेत्र आज भी इस संघर्षकर्ता के साहस, वीरता और विनम्रता, निष्ठा और प्रेम की गाथा सुनाते हैं। जहां भी आतंकवाद का नाम आता है वहां सऊदी अरब के निशान अवश्य मिलते हैं और अबू महदी अलमुहन्दिस हमेशा से सऊदी अरब की आतंकवादी योजना के मुक़ाबले में फ़्रंट लाइन पर थे और इसीलिए आश्चर्य की बात नहीं है कि सऊदी अरब इस जैसे संघर्षकर्ता और मानवता की रक्षा करने वाले मुजाहिद को आतंकवादी कहे।

ध्यान योग्य बात यह है कि सऊदी अरब के एमबीसी चैनल द्वारा शहीद अबू महदी अलमुहन्दिस को आतंकवादी कहे जाने पर इराक़ की सरकार और राजनैतिक हस्तियों की ओर से कड़ी प्रतिक्रिया सामने आई। इराक़ में अपनी योजनाओं को विफल होता देखकर बौखलाहट का शिकार सऊदी अरब यथावत इराक़ी स्वयं सेवी बल और इराक़ की राष्ट्रीय पहचान के विरुद्ध ज़हर उगल रहा है।

अंत में यह कहना ज़रूरी है कि इराक़ और सीरिया में सऊदी अरब की शैतानी चालें बुरी तरह फेल हो गयीं और यहीं वजह है कि वह और उसके पिट्ठु चैनल तरह तरह से अपनी पराजय का बदला लेने के लिए नित नये हथकंडे अपना रहे हैं।