लंदन कालेज फ़ार इकानोमी की प्रोफ़ेसर मज़ावी अलरशीद का कहना है कि सऊदी अरब ने अपनी अर्थ व्यवस्था को ध्वस्त होने से बचाने के नाम पर ख़र्चों में भारी कटौती का एलान किया है मगर यह स्थिति कोरोना वायरस और तेल की क़ीमतों में गिरावट की वजह से नहीं बल्कि बेहद ख़राब प्रबंधन का नतीजा है।
अब सरकार जो क़दम उठा रही है वह उस अर्थ व्यवस्था को बचाने की नाकाम कोशिश है जो कई नस्लों से लूटी जा रही थी। सरकार ने अभी जो एलान किया है वह शुरूआत है आगे भी बहुत कुछ होने वाला है जिसमें सरकारी नौकरियां कम की जाएंगी और तनख़्वाहों में ज़बरदस्त कटौती होगी। बल्कि यह कहना चाहिए कि सरकार अपने सारे कर्मचारियों की तनख़्वाहें अदा करने के क़ाबिल ही नहीं रहेगी।
तेल की क़ीमतों में सुधार की कोई उम्मीद नज़र नहीं आती और कोरोना का प्रसार भी दुनिया के कोने कोने और ख़ुद सऊदी अरब में अभी जारी है। सरकारी ख़ज़ाने को जो घाटा पहुंच चुका है उसे टैक्स बढ़ाकर पूरा नहीं किया जा सकता।
जो आर्थिक क़दम उठाए जा रहे हैं उनके गंभीर राजनैतिक परिणाम होंगे और हालात अनिश्चित दिशा की ओर जाएंगे।
सऊदी अरब में यह बात तो खूब होती है कि सरकार और जनता के बीच एक अलिखित समझौता है कि सरकार देशवासियों को सुरक्षा और सुविधाएं देगी और इसके जवाब में नागरिकों की ज़िम्मेदारी है कि वह राजनैतिक मामलों और देश के संचालन में दख़ल न दें मगर ज़मीनी सच्चाई यह है कि 1933 के बाद बहुत अधिक आर्थिक संपन्नता के दौर में भी सऊदी शाही सरकारों के सामने चुनौतियां आती रही हैं।
सऊदी अरब में राजकुमारों और उनसे जुड़े लोगों को सरकारी ख़ज़ाने से तनख़्वाहें मिलती हैं इसके अलावा उन पर इस तरह पैसा लुटाया जाता है कि वह पूरा साल यूरोपीय देशों में छुट्टियां गुज़ारते और शिकार करते करते गुज़ार देते हैं। कभी स्टेडियम ख़रीदते हैं कभी एतिहासिक इमारतें ख़रीदते हैं।
केवल आले सऊद परिवार से संबंध होना ही काफ़ी है, ऐसे हर व्यक्ति का पूरा ख़र्च सरकारी ख़ज़ाने से अदा किया जाता है।
क्षेत्रीय स्तर पर देखा जाए तो सऊदी अरब अरबों डालर अरब देशों में जनान्दोलनों को कुचलने और यमन युद्ध पर ख़र्च कर रहा है जिसके नतीजे में बहुत तेज़ी से सऊदी अरब का सरकारी ख़ज़ाना ख़ाली होता गया है।
सऊदी अरब ने इतना पैसा लुटाया लेकिन उसके लिए इलाक़े में सुरक्षा नहीं पैदा हुई बल्कि उसने अपने लिए ख़तरे और बढ़ा लिए हैं।
एक तरफ़ नागरिकों की आमदनी लगातार कम हो रही है और दूसरी ओर महंगाई तेज़ी से बढ़ रही है यह स्थिति देश में कभी भी भयानक ज्वालामुखी की तरह फट पड़ेगी।
स्रोतः मिडिल ईस्ट आई