12 मई 2020 - 14:40
मोदी जी कोरोना की लड़ाई सरकार अकेले नहीं लड़ सकती, इस लड़ाई को जीतने के लिए देश में अपार क्षमताएं फैली हुई हैं उन्हें अपनाइए और

भारत में केन्द्र सरकार ने लाक डाउन का एलान किया और इसके फ़ायदे और नुक़सान दोनों देख लिए। लाक डाउन से क्या फ़ायदा हुआ इस बारे में सरकार की ओर से कहा जा रहा है कि अगर यह क़दम न उठाया जाता तो लाखों की संख्या में लोग कोरोना से प्रभावित होते वहीं आज भारत की जो तसवीर दुनिया के सामने है वह चीख़ चीख़ कर कह रही है कि लाक डाउन से दसियों लाख की संख्या में लोग प्रभावित हुए हैं।

यह बात जानकार शुरू से ही कह रहे हैं कि लाक डाउन मिडिल क्लास और अपर मिडिल क्लास के लिए तो कुछ कठिनाइयों और परेशानियों वाला विकल्प है लेकिन ग़रीबों और पहले ही भुखमरी झेल रहे लोगों के लिए यह जानलेवा है। भारत की बात की जाए तो आज भी यह ग़रीब देश ही है। बेशक भारत की इकानोमी 3 ट्रिलियन डालर के क़रीब जा पहुंची है मगर यह सच्चाई है कि भारत में ग़रीबी का जो भयावह रूप है वह दुनिया में कम ही देशों में नज़र आता है।

लाक डाउन में ज़रूरत के तहत बार बार किया जा रहा विस्तार मज़दूरों और ग़रीबों के लिए जानलेवा बन गया है। यही कारण है कि मज़दूर जान ख़तरें में डालकर बल्कि अपनी जान देकर घर जाने की कोशिश कर रहे हैं। सैकड़ों की संख्या में लोगों की मौत हो चुकी है और ट्रकों, टैंपुओं, साइकिलों पर और पैदल मज़दूर जिस तरह सफ़र कर रहे हैं वही भारत की असली तसवीर है जिसे 3 ट्रिलियन डालर की इकानोमी पर इतराने वाले भारतीय शासकों को ग़ौर से देखना चाहिए और यह सोचना चाहिए कि संसाधनों और धन के वितरण की प्रक्रिया अगर सुधारी न गई तो नतीजा यही होगा कि कुछ गिनती के लोग तो इसी दुनिया में रहते हुए स्वर्ग की आसानियों वाला जीवन गुज़ारेंगे और अधिकतर आबादी के लिए जीवन नरक ही बना रहेगा।

भारत सरकार कोरोना वायरस से निपटने के लिए दो जगहों पर बहुत सक्रिय नज़र आती है। एक तो उसने पुलिस बल को भारी संख्या में तैनात किया है और दूसरे मुख्यमंत्रियों से बार बार चर्चाएं कर रही है। यह दोनों चीज़ें अच्छी हैं लेकिन बहुत से प्रभावी तरीक़े हैं जिनसे दुनिया के देशों में बहुत अच्छा परिणाम सामने आया है जबकि भारत सरकार उन पर ध्यान नहीं दे रही है। भारत सरकार को अच्छी तरह यह बात समझ लेनी चाहिए कि कोरोना से लड़ाई देश की हर संस्था, हर संगठन, हर गुट बल्कि हर व्यक्ति को लड़नी होगी और यह लड़ाई संगठित होकर लड़नी होगी। मोदी जी को भूल जाना होगा कि इस लड़ाई में वह भाजपा के नेता हैं और भाजपा देश की सत्ताधारी पार्टी है और इस पार्टी को जन्म देने वाला संगठन आरएसएस है जिसने दूसरे भी बहुत से संगठनों को जन्म दिया है। मोदी जी को यह सोच बनानी होगी कि भारत एक देश है, इस देश में एक राष्ट्र बसता है, पूरे राष्ट्र के सामने एक बड़ा ख़तरा आ खड़ा हुआ है और सबको मिलकर लड़ाई लड़नी है।

इस लड़ाई में कुछ बड़े महत्वपूर्ण उपाय हैं जो दूसरे देशों में कारगर साबित हुए हैं,

  1. पूरे देश के मेडिकल स्टाफ़ का मनोबल बढ़ाया जाए, उन्हें एहसास दिलाया जाए कि इस समय कोरोना के ख़िलाफ़ जारी लड़ाई में वह फ़्रंटलाइन पर हैं और पूरा देश उनके पीछे खड़ा है। पुणे के एक अस्पताल में एक नर्स को पीपीई मांगने पर अधिकारी की ओर से दी जाने वाली गालियों की वीडियो एकमात्र घटना नहीं बल्कि एक रुजहान है जो पूरे देश में मौजूद है। नर्सों का शोषण बहुत ज़माने से हो रहा है और इस कोरोना की आपदा के समय यह शोषण बढ़ गया है। पूरे मेडिकल स्टाफ़ को एहसास दिलाने की ज़रूरत है कि देश वाक़ई उनका आभारी है और यह आभार केवल शाब्दिक नहीं है।
  2. कोरोना के ख़िलाफ़ लड़ाई में हर समुदाय के प्रतिष्ठित लोगों विशेष रूप से धर्मगुरुओं की मदद लेनी ज़रूरी है और उन्हें संवाद का माध्यम बनाया जाना चाहिए क्योंकि यह माध्यम जनता और सरकार के बीच संवाद को बहुत मज़बूत बना सकता है। धर्मगुरुओं के साथ ही हर समुदाय की दूसरी लोकमान्य हस्तियों, लेखकों और वक्ताओं की मदद लेकर अच्छे लक्ष्य हासिल किए जए सकते हैं। इन माध्यमों का सहारा लेने का फ़ायदा यह होगा कि कोरोना के ख़िलाफ़ लड़ाई का हर मोर्चा मज़बूती से सक्रिय होगा। हर मोर्चा से तात्पर्य यह है कि इस लड़ाई में जहां कोरोना की ट्रांसफ़र प्रक्रिया को रोकना है वहीं इस महामारी के कारण पैदा होने वाली अनगिनत और कई प्रकार की समस्याओं से भी निपटना है। बेरोज़गारी, भुखमरी, मज़दूरों को उनके घर पहुंचाना और इस सफ़र में उन्हें तकलीफ़ों से बचाना यह सब कोरोना के ख़िलाफ़ लड़ाई के मोर्चे हैं और इन सभी मोर्चों को सक्रिय करने की ज़रूरत है और इसके लिए समाज के हर समुदाय की प्रतिष्ठित हस्तियों की मदद लेना बहुत कारगर होगा। यह कई देशों में बहुत कामयाब उपाय साबित हुआ है।
  3. पूरे देश में मौजूद सामाजिक संगठनों को यह सारे लक्ष्य देकर सक्रिय करना ज़रूरी है। उन्हें एहसास दिलाया जाए कि सरकार और उनके बीच किसी तरह का अंतर नहीं है, सरकार उन्हें दिल से अपनाती है और मिल जुलकर कोरोना की लड़ाई को आगे ले जाना चाहती है।

पूरे देश में मौजूद इस तरह की क्षमताओं की लंबी सूची है और सरकार इससे अवगत है, इस समय मन से हर हिचकिचाहट निकाल कर और अंतर को भुलाकर एकजुट मोर्चा बनाने की ज़रूरत है क्योंकि यह लड़ाई भारत जैसे देश में केवल इसी तरीक़े से जीती जा सकती है।

अहमद अब्बास

नोटः पार्स टुडे का लेखक के विचार से सहमत होना अनिवार्य नहीं है