दो बाग़ियों ने जो दक्षिणी कोरिया की संसद में हैं सोमवार को बयान जारी करके माफ़ी मांगी है क्योंकि उन्होंने यह झूठी ख़बर फैलाई थी कि किम जोंग उन या मर गए हैं या मौत के बिल्कुल क़रीब हैं।
दक्षिणी कोरिया की सत्ताधारी डेमोक्रेटिक पार्टी की ओर से मांग बढ़ गई थी कि झूठी ख़बर फैलने वालों के ख़िलाफ़ कार्यवाही होनी चाहिए।
सार्वजनिक कार्यक्रमों से तीन हफ़्ते तक किम जोंग उन के अनुपस्थित रहने के बाद पश्चिमी मीडिया ने दक्षिणी कोरिया के एक मामूली अख़बार और गिने चुने सूत्रों के हवाले से अफ़वाह फैला दी कि उनकी मौत हो गई है या सर्जरी के बाद उनकी हालत ख़राब है।
अब जब साबित हो गया कि किम जोंग उन की मौत या बीमारी की सारी ख़बरें झूठ थीं तो पश्चिमी मीडिया के लिए यह सोचने का विषय है कि ख़बरें हासिल करने और उन्हें फैलाने का उनका स्टैंडर्ड कितना दुरुस्त है?
उत्तरी कोरिया के पूर्व डिपलोमैट थाई योंग हू ने जो दक्षिणी कोरिया में सांसद चुने गए हैं एक महीना पहले माफ़ी मांगी थी क्योंकि उन्होंने यह झूठी ख़बर फैला दी थी कि किम जोंग उन अपने पैर पर खड़े नहीं हो पा रहे हैं मगर कुछ ही दिनों बाद उत्तरी कोरिया के लीडर स्वस्थ नज़र आए।
सोमवार को थाई ने बयान जारी करके माफ़ी मांगी। थाई ने 2016 में उत्तरी कोरिया छोड़ दिया था उसके बाद से ही वह भविष्यवाणी करते रहते हैं कि उत्तरी कोरिया का सिस्टम ध्वस्त होने वाला है।
विपक्षी नेता जी सियोंग हू ने रोयटर्ज़ से बातचीत में कहा कि वह 99 प्रतिशत यक़ीन से कह सकते हैं कि किम की मौत हो चुकी है क्योंकि उनकी हार्ट सर्जरी नाकाम हो गई है। सोमवार को जी ने भी बयान जारी करके माफ़ी मांगी और कहा कि बहुत सोच समझ कर कोई बात कहनी चाहिए।
दक्षिणी कोरिया की सत्ताधारी डेमोक्रेटिक पार्टी ने कहा कि दोनो बाग़ियों के ख़िलाफ़ क़ानूनी कार्यवाही होनी चाहिए क्योंकि उन्होंने झूठ फैलाया।
यहां सवाल यह है कि सीएनएन, दक्षिणा कोरिया के अख़बार एनके और दूसरे मीडिया संस्थानों को क्या माफ़ी नहीं मांगनी चाहिए?