11 अप्रैल 2020 - 15:11
चार तरीक़े हैं जिनसे कोरोना वायरस की महामारी को ख़त्म किया जा सकता है

कोरोना वायरस सारी दुनिया में तबाही मचाए हुए है। रोज़ाना हज़ारों जानें जा रही हैं जबकि संक्रमितों की संख्या ढाई मिलियन से अधिक हो चुकी है। इन हालात में एक महत्वपूर्ण सवाल यही है कि कोरोना का ख़त्मा कब और कैसे होगा?

गार्डियन अख़बार में एडिनबरा विश्वविद्यालय में विश्व स्वास्थ्य विभाग की डायरेक्टर प्रोफ़ेसर देवी श्रीधर ने अपने एक लेख में दुनिया में कोरोना की महामारी के समाप्त होने के चार संभावित तरीक़े बताए हैं।

पहला तरीक़ा यह है कि दुनिया के सारे देश इस बात पर सहमत हो जाएं कि संक्रमण का बहुत कम ख़र्च में पता लगाएं और इसके लिए एक निर्धारित समय तक सारे देश अपनी अपनी सीमाएं बंद करके पूरी मेहनत से उन लोगों का पता लगाएं जो कोरोना से संक्रमित हैं।

चूंकि यह वायरस व्यापक पैमाने पर फैल चुका है इसलिए हो सकता है कि यह तरीक़ा ज़्यादा पसंद न किया जाए लेकिन सच्चाई यह है कि यही सबसे उपयोगी रास्ता है। क्योंकि एक तो इस वायरस को निष्क्रय कर देने वाली दवा अभी नहीं बनी है और दूसरी बात यह है कि इसका वैक्सीन बनाने में भी काफ़ी समय लग जाएगा जबकि तीसरा कारण यह है कि इस वायरस की लहर बार बार उठ सकती है और संक्रमित होकर ठीक हो चुके लोग दोबारा इससे संक्रमित हो सकते हैं।

इस समय न्यूज़ीलैंड इसी तरीक़े पर काम कर रहा है। उसने अपनी सारी सीमाएं बंद कर ली हैं। पूरी तरह देश को लाक डाउन कर दिया है। पूरे देश में टेस्टिंग की प्रक्रिया जारी है।

दूसरा तरीक़ा यह हो सकता है कि सरकारें जब तक वैक्सीन तैयार नहीं हो जाता बार बार लाक डाउन करें और अस्पतालों और चिकित्सा केन्द्रों की क्षमता बढ़ाएं जहां संक्रमितों का इलाज हो। मगर यह तरीक़ा आदर्श नहीं है क्योंकि इससे हेल्थ सेक्टर पर भारी दबाव पड़ेगा और साथ ही आर्थिक नुक़सान भी इससे बहुत ज़्यादा होगा। बार बार लाक डाउन करने से बेरोज़गारी बढ़ेगी और इससे सामाजिक समस्याएं भी पैदा होंगी।

प्रोफ़ेसर देवी श्रीधर के अनुसार तीसरा तरीक़ा यह हो सकता है कि सारी सरकारें दक्षिणी कोरिया का माडल अपनाएं। दक्षिणी कोरिया ने यह किया कि बड़े पैमाने पर टेस्टिंग की और अगर कोई संक्रमित मिला तो उन सारे लोगों को तीन हफ़्ते के लिए क्वैंरेटाेन्द्रों की क्षमता बढ़इन में भेज दिया जिनसे उस व्यक्ति का संपर्क होने की संभावना थी।

इसके लिए बहुत बड़े पैमाने पर अभियान चलाने की ज़रूरत है और इसके लिए काफ़ी बड़ी संख्या में कर्मियों की भी ज़रूरत होगी। इसके साथ साथ सामाजिक दूरी जैसे उपायों की मदद ली जा सकती है।

चौथा तरीक़ा यह हो सकता है कि कोरोना के जो भी लक्षण हैं उनका इलाज किया जाए। बीमार की हालत बिगड़ने न दी जाए और उसकी भरपूर देखभाल की जाए कि उसका शरीर कोरोना से लड़ने में सक्षम बना रहे यहां तक कि वायरस को हरा दे।

बेहतरीन रास्ता यह है कि कोरोना की रोकथाम भी की जाए साथ ही बड़े पैमाने पर टेस्टिंग की जाए। मगर यह काम उन देशों में हो सकता है जिनके पास आवश्यक मात्रा में सुविधाएं और संसाधन हैं मगर ग़रीब देशों में यह काम काफ़ी कठिन है।

स्रोतः गार्डियन