6 अप्रैल 2020 - 13:18
इस्लाम के स्वास्थ संबंधी निर्देश बीमारियों की रोकथाम के लिए बड़े कारगरः प्रोफ़ेसर ओज़ालेप

आस्ट्रेलिया की चार्ल्ज़ स्टीवर्ट युनिवर्सिटी के शिक्षक प्रोफ़ेसर ओज़ालेप ने एक लेख लिखा है जिसमें उन्होंने बताया है कि किस तरह कोरोना वायरस मुसलमानों की आस्थाओं को चुनौती दे रहा है और बदल रहा है। उनके लेख का शीर्षक भी यही है।

ओज़ालेप अपने लेख में लिखते हैं कि ईश्वर ने अपने पैग़म्बर के माध्यम से इस्लाम के नाम से जो धर्म भेजा है उसने स्वास्थ्य के संबंध में बड़े महत्वपूर्ण निर्देश दिए हैं और आज भी यह निर्देश मुसलमानों के बीच प्रचलित हैं। मुसलमान आज दुनिया भर में कोरोना वायरस से पैदा होने वाले संकट से जूझ रहे हैं लेकिन इस्लाम धर्म ने आस्थाओं, मान्यताओं और सांस्कृतिक स्तर पर जो निर्देश सुझाए हैं वह कोरोना से लड़ने के लिए मुसलमानों के सामने बहुत से उपाय पेश करते हैं।

कोरोना वायरस से बचने का एक महत्वपूर्ण उपाय व्यक्तिगत साफ़ सफ़ाई है। आज डाक्टर और चिकित्सा विशेषज्ञ कह रहे हैं कि कोरोना वायरस से बचने के लिए कम से कम बीस सेकेंड तक साबुन से हाथों को दिन में कई बार धोना ज़रूरी है।

क़ुरआन सूरए मुदस्सिर की आयत संख्या 74 में कहता है  وَ ثِیابَكَ فَطَهِّرयानी अपने कपड़े पाक साफ़ रखो। सूरए बक़रा की आयत संख्या 222 में कहता है وَ یُحِبُّ الْمُتَطَهِّرین‏  यानी ईश्वर पाक साफ़ रहने वालों को चाहता है। पैग़म्बरे इस्लाम ने कहा कि सफ़ाई सुथराई आधा ईमान है। उन्होंने मुसलमानों से कहा कि खाना खाने से पहले और बाद में अपने हाथों को धोएं।

मुसलमानों को हर दिन नमाज़ से पहले वुज़ू करने का निर्देश दिया गया है। वुज़ू में इंसान अपने हाथों और चेहरे को धोता है। वायरस को रोकने के लिए इतना काफ़ी नहीं है लेकिन प्रभावी ज़रूर है।