प्राप्त रिपोर्ट के मुताबिक़, जर्मनी की वित्तीय राजधानी कहा जाने वाला शहर फ्रैंकफर्ट शोक में डूबा हुआ है। कोरोना वायरस जैसे बड़े संकट के बीच इस प्रांत के प्रतिभाशाली वित्त मंत्री ने रेलवे ट्रैक पर अपनी जान दी। पुलिस को आशंका है कि थोमस शेफर ने आत्महत्या की है। उनका शव रेलवे ट्रैक के पास मिला है। शेफर जर्मनी के हेस्से राज्य के वित्त मंत्री थे। हेस्से प्रांत के सबसे बड़े शहर फ्रैंकफर्ट को जर्मनी की वित्तीय राजधानी के रूप में भी जाना जाता है। पुलिस के अनुसार, शनिवार को फ्रैंकफर्ट और माइंज़ शहर के बीच हाई स्पीड रेलवे ट्रैक पर एक शव मिलने की सूचना मिली, कुछ ही देर बाद शव की पहचान प्रांत के वित्त मंत्री शेफर के रूप में हुई।
घटनास्थल पर पहुची जांच टीम का कहना है कि प्रथम दृष्टि से ऐसा लगता है कि थोमस शेफर ने आत्महत्या की है। पुलिस ने इससे ज़्यादा और कोई जानकारी नहीं दी। फ्रैंकफर्ट शहर से निकलने वाले प्रमुख दैनिक अख़बार फ्रांकफुर्टर अलगेमाइन त्साइंटुग के मुताबिक़, अपनी जान लेने से पहले शेफर ने एक सुसाइड नोट भी छोड़ा था। अख़बार के अनुसार मामले की जांच से जुड़े सूत्रों ने उसे यह जानकारी दी है। पत्नी और दो बच्चों को अपने पीछे छोड़ गए शेफर बीते दो दशक से राज्य की राजनीति में सक्रिय थे। वह बीते 10 साल से प्रांत के वित्त मंत्री थे। उन्हें आने वाले वर्षों में प्रांत के प्रीमियर के रूप में उभरते नेता के तौर पर भी देखा जा रहा था। 54 साल के शेफर जर्मन चांसलर अंगेला मैर्केल की पार्टी सीडीयू के नेता थे। वह अक्सर सार्वजनिक रूप से सामने आते रहते थे।
इस बीच शेफर की मौत से स्तब्ध हेस्से के मुख्यमंत्री फोल्कर बूफिये रविवार को जब मीडिया के सामने आए तो उनकी आंखों में आंसू थे। बूफिये ने कहा, "उनकी सबसे प्रमुख चिंता यही थी कि क्या जनता की बड़ी उम्मीदें पूरी करने में सक्षम हो पाऊंगा, विशेष रूप से वित्तीय मदद के मामले में।” कोरोना वायरस के चलते जर्मनी के राजनीतिक गलियारे में किस तरह का तूफ़ान घुमड़ रहा है, इसका अंदाज़ा बूफिये के बयान से हुआ, "उनके सामने इससे बाहर निकलने का कोई साफ रास्ता नहीं था। वह मायूस थे और उन्हें हमारा साथ छोड़ना पड़ा। इससे हम सन्न हैं, मैं स्तब्ध हूँ।” जर्मनी की अधिकतर राजनीति पार्टियां शेफर की मृत्यु से अवाक सी हैं। वामपंथी पार्टी डी लिंके के नेता फाबियो दे मासी ने ट्विटर पर लिखा, "हम अक्सर राजनेताओें को आम इंसान के तौर पर नहीं देखते या उनके उस बोझ को भी नहीं देखते जो राजनीति उन्हें देती है।”