9 फ़रवरी 2020 - 19:08
आयत क्या कहती हैं? जो ईश्वर की याद है, ढिलाई करते हैं, लोक-परलोक में इसी प्रकार के परिणामों में ग्रस्त होंगे।

आसमानी किताबों और ईश्वरीय पैग़म्बरों की अनदेखी, जो लोगों के बीच ईश्वर की याद भुलाए जाने का मार्ग प्रशस्त करती है।

सूरए ताहा की आयत क्रमांक 125 और 126  का अनुवादः

मनुष्य कहेगाः हे मेरे पालनहार! तूने मुझे अंधा क्यों उठाया जबकि मैं (संसार में) तो आँखों वाला था? (ईश्वर उसके उत्तर में) कहेगाः जिस प्रकार तुझ तक हमारी आयतें आई थीं तो तूने उन्हें भुला दिया था, उसी प्रकार आज तुझे भी भुलाया जा रहा है।

 

 

संक्षिप्त टिप्पणी:

न केवल काफ़िर बल्कि वे मुसलमान भी जो क़ुरआन पर ध्यान नहीं देते हैं या नमाज़ अदा करने में, जो ईश्वर की याद है, ढिलाई करते हैं, लोक-परलोक में इसी प्रकार के परिणामों में ग्रस्त होंगे।

 

इन आयतों से मिलने वाले पाठ:

  1. ईश्वरीय दंड अत्यंत न्यायपूर्ण हैं और मनुष्य के पाप के अनुसार ही होते हैं।

  2. यद्यपि इस संसार में मनुष्य के लिए आंखें और दृष्टि बहुत महत्वपूर्ण है किंतु, प्रलय में आंखों का होना कहीं अधिक महत्वपूर्ण है ताकि मनुष्य स्वर्ग के सौंदर्य व उसकी अनुकंपाओं को देख सके।