8 फ़रवरी 2020 - 18:04
आयत क्या कहती हैं? जब भी मैं तुम्हारे पास कोई पैग़म्बर भेजूं तो अनुसरण करो कि इसी में तुम्हारा कल्याण है।

यदि तुमने उसके आदेशों का पालन न किया और ईश्वर को भुला बैठे तो तुम्हें लोक-परलोक में विभिन्न प्रकार की कठिनाइयों का सामना करना पड़ेगा।

सूरए ताहा की आयत क्रमांक 123 और 124 का अनुवादः

ईश्वर ने (आदम व उनकी पत्नी से) कहाः तुम दोनों उस स्वर्ग (और उच्च स्थान) से उतर जाओ कि (इसके बाद) तुममें से कुछ लोग, कुछ अन्य के शत्रु होंगे। फिर यदि मेरी ओर से तुम तक कोई (पैग़म्बर या) मार्गदर्शन पहुँचे तो जो कोई मेरे मार्गदर्शन का पालन करे तो वह न तो पथभ्रष्ट होगा और न ही कठिनाई में ग्रस्त होगा। और जो कोई मेरी याद से मुँह मोड़ेगा तो उसका जीवन अत्यंत संकीर्ण होगा और प्रलय के दिन हम उसे अंधा उठाएँगे।

 

संक्षिप्त टिप्पणी:

स्वाभाविक है कि जिसने ईश्वर को भुला कर उससे नाता तोड़ लिया हो उसके लिए संसार के अतिरिक्त कोई चीज़ नहीं बचती जिसे वह अपना लक्ष्य बनाए और इसके परिणाम स्वरूप वह केवल संसार के लिए ही अपना हर प्रयास करता है और दिन प्रतिदिन उसमें वृद्धि करता चला जाता है।

 

इन आयतों से मिलने वाले पाठ:

  1. मनुष्य का सौभाग्य व कल्याण, ईश्वरीय पैग़म्बरों के अनुसरण में निहित है।

  2. ईश्वर की याद से दूरी, व्याकुलता और दिशाहीनता का कारण बनती है चाहे मनुष्य के पास कितना ही धन क्यों न हो।

  3. जो व्यक्ति इस संसार में आध्यात्मिक वास्तविकताओं को देखने के लिए तैयार न हो वह प्रलय में अंधा बना कर उठाया जाएगा और यह संसार में उसके कर्मों का ही फल होगा।