25 जनवरी 2020 - 13:56
ख़ाशुक़जी हत्याकांड में सऊदी अरब की तरह अमरीका ईरान के मिसाइल हमले से होने वाली तबाही का सच भी क़िस्तों में बयान कर रहा है!!

सऊदी अरब के जाने पहचाने पत्रकार जमाल ख़ाशुक़जी की तुर्की के इस्तांबूल शहर में सऊदी वाणिज्य दूतावास के भीतर हत्या कर दी गई। हत्या के लिए बेहद दरिंदगी भरा तरीक़ा अपनाया गया।

लाश को टुकड़ों में काटा गया और फिर इन टुकड़ों को एसिड की मदद से जलाकर ख़त्म कर दिया गया। इस वीभत्स अपराध के बाद सऊदी क्राउन प्रिंस ने एक इंटरव्यू में कहा कि उन्हें भी बड़ी चिंता है कि जमाल ख़ाशुक़जी कहां हैं?

सऊदी प्रशासन यह समझ रहा था कि इस भीषण अपराध को छिपा लेना कुछ ज़्यादा मुश्किल नहीं होगा। मगर फिर इस घटना का मुद्दा अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर इतने बड़े पैमाने पर उछला कि अपनी ज़िद और धूर्त रवैए के लिए कुख्यात सऊदी क्राउन प्रिंस को बैक फ़ुट पर जाना पड़ा। अमरीकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रम्प के दामाद जेर्ड कुश्नर और अमरीकी विदेश मंत्री माइक पोम्पेयो ने बिन सलमान को दो टूक शब्दों में समझा दिया कि सऊदी सरकार इंकार के बजाए ख़ाशुक़जी की हत्या की ज़िम्मेदारी स्वीकार करे। इसके बाद सऊदी अरब ने कई बयान जारी किए और कई क़िस्तों में हत्या कांड की कुछ सच्चाइयां स्वीकार कीं।

यही अंदाज़ इस समय अमरीकी प्रशासन भी इस्तेमाल कर रहा है। क़ुद्स फ़ोर्स के कमांडर जनरल क़ासिम सुलैमानी की अमरीकी आतंकी हमले में हत्या के बाद ईरान ने जवाबी मिसाइल हमला करके इराक़ में अमरीका की एनुल असद छावनी को ध्वस्त कर दिया। अमरीकी राष्ट्रपति ट्रम्प इस हमले के बाद बार बार कहने लगे कि सब कुछ ठीक है, ईरान के हमले से किसी भी अमरीकी सैनिक को कोई नुक़सान नहीं पहुंचा है।

मगर इसके बाद धीरे धीरे सच्चाई क़िस्तों में बयान की जाने लगी। हालांकि विशेषज्ञ शुरू से ही कहने लगे थे कि ईरान ने जो हमला किया है उसमें सैकड़ों अमरीकी सैनिक निशाना बने हैं। बहरहाल बाद में पेंटागोन ने माना कि 11 अमरीकी सैनिक घायल हुए हैं जिनका जर्मनी में इलाज चल रहा है और अब पेंटागोन ने शुक्रवार को कहा कि ईरान के मिसाइल हमले के कारण 34 अमरीकी सैनिक मानसिक रूप से बीमार हो गए हैं जिनका इलाज हो रहा है।  

इस्राईली अख़बार हाआरेत्ज़ के एक पत्रकार ने ट्वीट किया था कि 200 से अधिक अमरीकी सैनिकों को इलाज के लिए तेल अबीब लाया गया है और कुवैत के एक अख़बार ने लिखा था कि अनेक अमरीकी सैनिकों को कुवैत के एक अस्पताल में भर्ती कराया गया है।

पेंटागोन भी अगर बार बार बयान बदल रहा है तो इसकी वजह यह है कि उस पर दबाव पड़ रहा है और दबाव उस समय तक जारी रहेगा जब तक सच्चाई काफी हद तक सामने नहीं आ जाती।