इससे पहले 3 जनवरी को अमरीका द्वारा ईरान के कमांडर मेजर जनरल सुलेमानी की हत्या की निंदा करते हुए कहा था कि यह ऐसा ही जैसे कोई अमरीकी विदेश मंत्री की हत्या कर दे।
ग़ौरतलब है कि 8 जनवरी को ईरान ने जनरल सुलेमानी और उनके साथियों के ख़ून का बदला लेने के लिए इराक़ में अमरीका के दो सैन्य अड्डों पर दो दर्जन से अधिक मिसाइल फ़ायर किए थे।
इस हमले के तुरंत बाद, ट्रम्प ने दावा किया था कि ईरान की जवाबी कार्यवाही में अमरीका के किसी सैनिक की जान नहीं गई है और कोई घायल भी नहीं हुआ है।
हालांकि पिछले हफ़्ते हमले में घायल होने वाले अमरीकी सैनिकों के बारे में मीडिया रिपोर्टों के बाद, पेंटागन ने स्वीकार किया था कि ईरान के हमले में घायल होने वाले 11 सैनिकों को उपचार के लिए कुवैत और जर्मनी ले जाया गया था।
मर्फ़ी का कहना था कि ईरान की जवाब कार्यवाही में पहुंचने वाले भारी जानी व माली नुक़सान के बावजूद, ट्रम्प लगातार झूठ बोल रहे हैं और वह अमरीका जनता की आंखों में धूल झोंकने की कोशिश कर रहे हैं।
बुधवार को पत्रकारों ने जब ट्रम्प से घायल अमरीकी सैनिकों के बारे में पूछा था तो उन्होंने एक बार फिर यही दावा किया कि सैनिकों को मामूली चोटें आई थीं और उनमें से कुछ को सिर्फ़ सिर में दर्द के लिए उपचार के लिए ले जाया गया था।