17 जनवरी 2020 - 15:22
परवेज़ मुशर्रफ ने विशेष अदालत के फ़ैसले को सुप्रीम कोर्ट में दी चुनौती

पाकिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ ने, इस देश की विशेष अदालत द्वारा उन्हें दी गई मौत की सज़ा के फ़ैसले के ख़िलाफ़ सुप्रीम कोर्ट में अपील की है।

प्राप्त रिपोर्ट के मुताबिक़, पाकिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ ने इस देश की विशेष अदालत के उस फ़ैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनैती दी है जिसमें उन्हें राजद्रोह के मामले में दोषी करार देते हुए फांसी की सज़ा सुनाई गई थी। इससे पहले पाकिस्तान की एक विशेष अदालत ने पिछले साल 17 दिसंबर को 74 वर्षीय सेवानिवृत्त जनरल को हाई प्रोफाइल राजद्रोह के मामले में छह साल की लंबी सुनवाई के बाद दोषी क़रार देते हुए मौत की सज़ा सुनाई थी। पाकिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति मुशर्रफ़ फिलहाल दुबई में अपना इलाज करा रहे हैं।

बात दें कि परवेज़ मुशर्रफ को बड़ी राहत देते हुए, लाहौर हाई कोर्ट ने विशेष अदालत के गठन को असंवैधानिक घोषित कर दिया क्योंकि पूर्व राष्ट्रपति के ख़िलाफ़ राजद्रोह का मामला क़ानून के अनुसार तैयार नहीं किया गया था। मुशर्रफ़ के अधिवक्ता बैरिस्टर सलमान सफ़दर ने विशेष अदालत के फ़ैसले के ख़िलाफ़ सुप्रीम कोर्ट में 90 पृष्ठों की अपील दायर की है जिसमें मुशर्रफ ने विशेष अदालत के फ़ैसले को रद्द किए जाने का अनुरोध किया है।

अपील में कहा गया है कि माननीय अदालत कोई अन्य उपाय जो सही और उचित जान पड़ता है उसे अपना सकती है। एक्सप्रेस ट्रिब्यून के अनुसार याचिका में कहा गया है कि विशेष अदालत में सुनवाई के दौरान पूर्व राष्ट्रपति की अनुपस्थिति जानबूझकर नहीं थी बल्कि वह अदालत में पेश होने में अक्षम थे क्योंकि वह बीमार थे और उनका स्वास्थ्य ठीक नहीं था। इसमें कहा गया है कि विशेष अदालत ने मुशर्रफ की बीमारी को स्वीकार कर लिया था, लेकिन पूर्व राष्ट्रपति को उनकी अनुपस्थिति में ही उन्हें दोषी ठहरा दिया। मुशर्रफ 2016 से ही दुबई में रह रहे हैं जहां वह इलाज कराने के लिए गए थे। जबसे उन्होंने पाकिस्तान छोड़ा है तब से सुरक्षा एवं स्वास्थ्य कारणों का हवाला देते हुए वह वापस नहीं लौटे हैं।

ज्ञात रहे कि, पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री नवाज़ शरीफ के नेतृत्व वाली पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नवाज़ (पीएमएल-एन) की सरकार ने पूर्व सेना प्रमुख के खिलाफ़ 2013 में राजद्रोह का मामला दायर किया था। इन दिनों दुबई में रह रहे मुशर्रफ पर आरोप है कि उन्होंने नवंबर 2007 में संविधान को स्थगित करते हुए आपातकाल लगाया था। इसी वजह से ऊंची अदालतों के कई न्यायाधीशों को उनके घरों में बंद कर दिया और 100 से अधिक न्यायाधीशों को बर्खास्त कर दिया गया था। लाहौर उच्च न्यायालय ने राजद्रोह मामले में मुशर्रफ के मुक़द्दमे को असंवैधानिक घोषित कर दिया था जिसमें पूर्व सेना प्रमुख को दी गयी मौत की सज़ा रद्द हो गयी थी।